स्वदेशी सैन्य प्रणालियां भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक: गुरमीत सिंह
असम रेजिमेंट के 7वें बैच की पासिंग आउट परेड में शामिल हुए राज्यपाल गुरमीत सिंह पासिंग परेड केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा के एक नये अध्याय का शुभारंभ: राज्यपाल शिलांग/नैनीताल, 29 मई (हि.स.)। उत्तराखंड के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट ज
असम रेजिमेंट के 7वें बैच की पासिंग आउट परेड के दौरान विदेशी सैन्य अधिकारियों का परिचय प्राप्त करते उत्तराखंड के राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह।


असम रेजिमेंट के 7वें बैच की पासिंग आउट परेड में शामिल हुए राज्यपाल गुरमीत सिंह

पासिंग परेड केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा के एक नये अध्याय का शुभारंभ: राज्यपाल

शिलांग/नैनीताल, 29 मई (हि.स.)। उत्तराखंड के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि असम रेजिमेंट के सातवें बैच के अग्निवीरों ने अपने कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन एवं दृढ़ संकल्प से यह सिद्ध किया है कि भारत की सीमाएं सुरक्षित हाथों में हैं। पासिंग परेड केवल एक औपचारिक सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा के एक नये अध्याय का शुभारंभ है।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सिंह शुक्रवार काे मेघालय राज्य के शिलांग में स्थित असम रेजिमेंटल सेंटर में आयोजित असम रेजिमेंट के सातवें बैच के अग्निवीरों की पासिंग आउट परेड कां संबाेधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रशिक्षित अग्निवीरों को राष्ट्रसेवा, अनुशासन, समर्पण एवं सैन्य मूल्यों के प्रति प्रेरित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल ने कहा कि पासिंग परेड केवल एक औपचारिक सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा के एक नये अध्याय का शुभारंभ है। उन्होंने कहा कि असम रेजिमेंट के सातवें बैच के अग्निवीरों ने अपने कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन एवं दृढ़ संकल्प से यह सिद्ध किया है कि भारत की सीमाएं सुरक्षित हाथों में हैं। उन्होंने अग्निवीरों को संबोधित करते हुए कहा कि अब उनकी कोई क्षेत्रीय अथवा व्यक्तिगत पहचान नहीं है, बल्कि उनकी एकमात्र पहचान भारतीय सैनिक की है। उनका एकमात्र धर्म राष्ट्रधर्म और एकमात्र जाति भारतीय है।

राज्यपाल ने असम रेजिमेंट से अपने आत्मीय संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह स्वयं इस गौरवशाली रेजिमेंट का हिस्सा रहे हैं। यहां उपस्थित होकर उन्हें अपनी मातृ रेजिमेंट में घर वापसी जैसा अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि असम रेजिमेंट ने उन्हें केवल सैनिक के रूप में प्रशिक्षित नहीं किया, बल्कि अनुशासन, उत्कृष्ट परंपराओं और राष्ट्रसेवा के संस्कार भी प्रदान किये। उन्होंने कहा कि असम रेजिमेंट का इतिहास वीरता, बलिदान और राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक रहा है। जब-जब राष्ट्र पर संकट आया, तब-तब इस रेजिमेंट के वीर सैनिकों ने अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए शत्रुओं के मंसूबों को विफल किया। उन्होंने अग्निवीरों से इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता और रणनीतिक दक्षता से भी जीते जाएंगे। उन्होंने अग्निवीरों से साइबर सुरक्षा, ड्रोन तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा आधुनिक सैन्य प्रणालियों में दक्षता विकसित करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सशस्त्र बलों का तीव्र गति से आधुनिकीकरण हुआ है तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिली है। स्वदेशी सैन्य प्रणालियां भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि अग्निवीर आधुनिक, आत्मविश्वासी एवं तकनीक-सक्षम नयी पीढ़ी के योद्धा हैं, जिन पर देश का भविष्य सुरक्षित है। राज्यपाल ने अग्निवीरों के माता-पिता एवं अभिभावकों का भी अभिनंदन करते हुए कहा कि वे ऐसे परिवार हैं जिन्होंने अपने पुत्रों को राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित किया है। ऐसे परिवार राष्ट्र की वास्तविक शक्ति हैं। उन्होंने सभी अग्निवीरों को सफल सैन्य जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हुए देश की सेवा के प्रति सदैव समर्पित रहने का आह्वान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी