खरीफ सीजन में उर्वरक कालाबाजारी पर जिला प्रशासन सख्त, जिले में गठित विशेष उड़नदस्ता दल
रायगढ़, 29 मई (हि.स.)।आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए किसानों को पर्याप्त मात्रा में निर्धारित मूल्य पर रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। वैश्विक परिस्थितियों और उर्वरकों की मांग को ध्यान में र
उर्वरक कालाबाजारी पर रोक


रायगढ़, 29 मई (हि.स.)।आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए किसानों को पर्याप्त मात्रा में निर्धारित मूल्य पर रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। वैश्विक परिस्थितियों और उर्वरकों की मांग को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी मयंक चतुर्वेदी ने जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी, अवैध भंडारण तथा अनियमित विक्रय पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से विकासखंडवार विशेष ‘उड़नदस्ता दल’ (फ्लाइंग स्क्वॉड) का गठन किया है।

यह आदेश कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, नवा रायपुर द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार गठित उड़नदस्ता दल में कार्यपालिक दण्डाधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी तथा उर्वरक निरीक्षक शामिल रहेंगे। ये दल जिले के विभिन्न विकासखंडों में नियमित और औचक निरीक्षण कर उर्वरकों के भंडारण, वितरण और विक्रय व्यवस्था की निगरानी करेंगे।

जिला प्रशासन ने उड़नदस्ता दलों को विशेष रूप से निर्देशित किया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसानों को उर्वरकों के साथ अन्य सामग्री जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व, कीटनाशक रसायन, वृद्धि हार्मोन या अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग कर खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए। साथ ही सभी निजी उर्वरक विक्रेताओं के यहां पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक तथा वास्तविक भौतिक स्टॉक का मिलान किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान दुकानों में उपलब्ध उर्वरक मात्रा एवं निर्धारित मूल्य सूची का स्पष्ट प्रदर्शन भी अनिवार्य रूप से जांचा जाएगा। प्रत्येक उर्वरक विक्रेता द्वारा कृषक विवरण पंजी संधारित किया जा रहा है या नहीं, इसकी भी जांच होगी। इस रजिस्टर में किसान का नाम, व्यक्तिगत जानकारी, भूमि विवरण तथा विक्रय किए गए उर्वरक की मात्रा दर्ज होना आवश्यक रहेगा। थोक से फुटकर वितरण तक उर्वरकों की पूरी सप्लाई चेन पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त सब्सिडी वाले उर्वरकों के औद्योगिक उपयोग की आशंका को देखते हुए पशु आहार निर्माण, रेसिन एवं प्लाईवुड उद्योगों सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों में भी औचक निरीक्षण किए जाएंगे।

कलेक्टर ने जिले की अंतर्राज्यीय सीमाओं पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि जिले से अन्य राज्यों में अवैध रूप से उर्वरकों की बिक्री या परिवहन रोका जा सके। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर प्रकरण न्यायालय में भी प्रस्तुत किए जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान