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डोंगरगढ़ से संचालित हो रहा था पूरा नेटवर्क
बलरामपुर, 29 मई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ का फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भर्ती कराने वाले गिरोह का बलरामपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में मुख्य आरोपित समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
बलरामपुर पुलिस ने आज शुक्रवार को अपने बयान में बताया कि मामले की जानकारी 28 अप्रैल 2026 को हुई, जब तहसीलदार बलरामपुर ने थाना कोतवाली बलरामपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में बताया गया कि 204 कोबरा बटालियन सीआरपीएफ करनपुर जगदलपुर में पदस्थ कांस्टेबल सुमित अचल सिंह ने विशाल सोनी के शैक्षणिक एवं अन्य दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर अपने नाम से स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र बनवाया था। यह आवेदन ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से तहसील कार्यालय बलरामपुर में प्रस्तुत किया गया था।
शिकायत की जांच के बाद पुलिस ने थाना बलरामपुर में अपराध क्रमांक 78/2026 दर्ज कर बीएनएस की विभिन्न धाराओं तथा आईटी एक्ट के तहत मामला कायम किया। विवेचना के दौरान 14 मई 2026 को राजस्थान के धौलपुर जिले के ग्राम रुंध निवासी सुमित अचल सिंह को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार आरोपित ने छत्तीसगढ़ राज्य के आरक्षण कोटे का अवैध लाभ लेकर वर्ष 2023 में एसएससी के माध्यम से सीआरपीएफ में भर्ती हासिल की थी।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को इस फर्जीवाड़े के बड़े नेटवर्क का पता चला। मामले में मुख्य आरोपित मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के ग्राम खांद का पुरा निवासी विवेक सिंह तोमर और सह-आरोपित आकाश सिंह शर्मा को 22 मई 2026 को रायपुर से हिरासत में लेकर बलरामपुर लाया गया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर दोनों को 23 मई को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि विवेक सिंह तोमर ने स्वयं भी फर्जी दस्तावेजों के जरिए डोंगरगढ़ से छत्तीसगढ़ का निवास प्रमाण पत्र बनवाया था। वहीं आकाश शर्मा ने अपना नाम बदलकर तुकेश्वर पिता भोजराम निवासी बलरामपुर दर्शाते हुए फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार करवाया। साथ ही दीपक चौरसिया के शैक्षणिक दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर निवासी प्रमाण पत्र हासिल किया गया।
मामले की जांच में राजनांदगांव जिले के बाघनदी थाना क्षेत्र स्थित सीतागोटा निवासी ओमप्रकाश चंद्रवंशी को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि विवेक सिंह तोमर अलग-अलग राज्यों के लोगों के नाम से छत्तीसगढ़ का निवास प्रमाण पत्र बनवाने का काम देता था। इसके एवज में प्रति व्यक्ति 4 से 5 हजार रुपये लेकर ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर फर्जी सिटीजन आईडी बनाई जाती थी। फिर आवश्यक दस्तावेज डाउनलोड कर उनमें एडिटिंग कर संबंधित व्यक्ति का नाम जोड़कर ऑनलाइन आवेदन जमा किया जाता था।
पुलिस ने आरोपित के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किया गया कंप्यूटर सिस्टम भी जब्त किया है। जांच में यह भी सामने आया कि विवेक सिंह तोमर एक फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करवाने के बदले प्रति व्यक्ति 3 से 4 लाख रुपये तक वसूलता था।
पुलिस विवेचना में यह तथ्य भी सामने आया है कि केंद्रीय पुलिस बलों की भर्ती में छत्तीसगढ़ राज्य का कटऑफ अन्य राज्यों की तुलना में कम होने के कारण दूसरे राज्यों के लोग फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर भर्ती का लाभ ले रहे थे। जांच में यह भी पता चला कि बलरामपुर के अलावा डोंगरगढ़ तहसील कार्यालय से भी लगभग 20 से 25 फर्जी स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। इन प्रमाण पत्रों का उपयोग कर कई गैर-निवासी युवक सीआरपीएफ, एसएसबी और सीआईएसएफ जैसे केंद्रीय बलों में भर्ती हुए हैं अथवा भर्ती होने का प्रयास कर चुके हैं। पुलिस ने सभी आराेपिताें काे गिरफ्तार कर आज न्यायालय में पेश किया है।
पुलिस अब संबंधित केंद्रीय सुरक्षा बलों से पत्राचार कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय