दिल्ली हाई कोर्ट ने सहकर्मी से बलात्कार के आरोपित वकील को दी जमानत
नई दिल्ली, 29 मई (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने महिला वकील से दुष्कर्म के आरोपित वकील को जमानत दे दी है। जस्टिस अनूप जयराम भांभानी ने आरोपित और महिला वकील के बीच समझौता होने के आधार पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। आरोपित वकील पर ये भी आरोप है
दिल्ली हाई कोर्ट ने सहकर्मी से बलात्कार के आरोपित वकील को दी जमानत


नई दिल्ली, 29 मई (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने महिला वकील से दुष्कर्म के आरोपित वकील को जमानत दे दी है। जस्टिस अनूप जयराम भांभानी ने आरोपित और महिला वकील के बीच समझौता होने के आधार पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। आरोपित वकील पर ये भी आरोप है कि उसने दो न्यायिक अधिकारियों के जरिये पीड़ित महिला वकील को प्रभावित करने की कोशिश की।

कोर्ट ने आरोपित वकील को 50 हजार के मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया। कोर्ट ने आरोपित वकील को निर्देश दिया कि वो अपने मोबाइल फोन का नंबर जांच अधिकारी को उपलब्ध कराएगा, ताकि उससे कभी भी संपर्क किया जा सके। कोर्ट ने आरोपित वकील को बिना कोर्ट की अनुमति के देश छोड़कर बाहर नहीं जाने का आदेश दिया। इसके अलावा जमानत के दौरान आरोपित वकील किसी भी गवाह से संपर्क नहीं करेगा और उन्हें कभी भी प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा।

कोर्ट ने कहा कि आरोपित वकील दिल्ली में प्रैक्टिस करता है और दिल्ली का स्थायी निवासी है। उसने कोर्ट के आदेश पर सरेंडर भी किया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सामग्री, मेडिकल साक्ष्य, और सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिया है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आरोपित ने न्यायिक हिरासत में बतौर विचाराधीन कैदी पर्याप्त समय गुजारा है। अब उसे हिरासत में रखने का कोई मतलब नहीं है और उसे जमानत दी जाती है।

इस मामले में पीड़ित महिला वकील ने 24 जून, 2025 को नेब सराय थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला वकील की शिकायत पर 25 जून, 2025 को भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 506, 323 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज किया था। महिला वकील ने अपनी शिकायत में कहा था कि आरोपी वकील ने उसके साथ कई स्थानों पर रेप किया। दिल्ली पुलिस ने 23 अगस्त, 2025 को चार्जशीट दाखिल किया था। उसके बाद 24 नवंबर, 2025 को पूरक चार्जशीट दाखिल किया गया था। इस मामले में आरोपित को साकेत कोर्ट ने 16 जुलाई, 2025 को अग्रिम जमानत दी थी जिसे उच्च न्यायालय ने 7 नवंबर, 2025 को निरस्त कर दिया था। इस मामले में दो न्यायिक अधिकारियों ने महिला वकील पर केस वापस लेने का दबाव बनाया था। दोनों न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ उच्च न्यायालय प्रशासन ने कार्रवाई की है।

सुनवाई के दौरान आरोपित वकील की ओर से कहा गया कि महिला वकील के साथ उसका पांच सालों से संबंध था। दोनों ही बालिग हैं और लीगल प्रोफेशन से जुड़े हुए हैं। महिला वकील ने पहले कभी भी इस मामले में शिकायत नहीं की थी। यहां तक कि इस मामले में दर्ज एफआईआर में दोनों के बीच सहमति बनी कि केस खत्म किया जाए।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी