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नई दिल्ली, 29 मई (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति की ओर से भाजपा नेता सी सदानंदन मास्टर को राज्यसभा का सदस्य मनोनीत करने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि राष्ट्रपति को किसी राजनेता को भी संविधान के अनुच्छेद 80(3) के तहत किसी विशेषज्ञ के रुप में नामित करने का अधिकार है।
याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और वकील सुभाष थिक्कारन ने दायर की थी। याचिका में भाजपा नेता सी सदानंदन मास्टर को राज्यसभा का सदस्य मनोनीत करने के राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील एमपी राजू ने कहा कि 12 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 80(3) का प्रयोग करते हुए चार लोगों को राज्यसभा के सदस्य के रुप में नामित किया था। इनमें से तीन तो राष्ट्रीय स्तर की हस्तियां थीं लेकिन भाजपा नेता सी सदानंद मास्टर को कोई विशेषज्ञता हासिल नहीं है। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति को जो विशेषाधिकार है उसका दायरा काफी बड़ा है। कोर्ट ने कहा कि संविधान में अनुच्छेद 80 के तहत किसी व्यक्ति को बतौर राज्यसभा सदस्य नामित करने के लिए न तो किसी प्रक्रिया का जिक्र नहीं किया गया है और न ही कोई ऐसी परिभाषा दी गई है जो उसकी श्रेणी में आती हो।
कोर्ट ने कहा कि महज इस आधार पर किसी व्यक्ति ने पूर्व में कोई चुनाव लड़ा है उसे संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत मनोनीत होने से अयोग्य नहीं करार दिया जा सकता है।
बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 80(3) के तहत राष्ट्रपति राज्यसभा के सदस्य के रुप में 12 सदस्य नामित कर सकते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रभात मिश्रा