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जयपुर, 26 मई (हि.स.)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने अदालती आदेश के बावजूद प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव 15 अप्रैल तक नहीं कराने के खिलाफ दायर अवमानना याचिकाओं को सारहीन मानते हुए निस्तारित कर दिया है। अदालत ने कहा कि कोर्ट की ओर से राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को चुनाव कराने के लिए 31 जुलाई का समय दिया जा चुका है। ऐसे में अवमानना याचिकाएं महत्वहीन हो गई हैं। इसलिए उन्हें निस्तारित किया जा रहा है। जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस अनिल उपमन की खंडपीठ ने यह आदेश गिर्राज देवंदा और संयम लोढा की अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा और पुनीत सिंघवी ने कहा कि खंडपीठ ने पूर्व में आदेश जारी कर 15 अप्रैल तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने को कहा था, लेकिन तय समय तक चुनाव नहीं कराए गए। ऐसे में याचिकाकर्ताओं की ओर से अवमानना याचिका पेश की गई थी। इसके बाद राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने यह समय बढाने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया था, लेकिन तब तक अदालत की अवमानना की जा चुकी थी। वहीं राज्य चुनाव आयोग की ओर से अधिवक्ता अमित कुडी ने कहा कि उन्हें राज्य सरकार से जरूरी डेटा समय पर नहीं मिला। आयोग सीधे तौर पर अवमानना का दोषी नहीं है और ना ही आयोग ने जानबूझकर अवमानना की है। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने अवमानना याचिकाओं को सारहीन मानते हुए निस्तारित कर दिया। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 15 अप्रैल तक का समय दिया था, लेकिन तब तक चुनाव नहीं कराए गए। वहीं बाद में दोनों की ओर से समय बढाने के लिए प्रार्थना पत्र दिए गए। जिस पर अदालत ने गत 11 मई को बहस सुनकर फैसला सुरक्षित रखा था। इसके बाद अदालत ने गत 22 मई को फैसला सुनाते हुए शहरी स्थानीय निकायों के वार्ड परिसीमन तथा मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का काम 20 जून तक पूरा कर 31 जुलाई तक चुनाव कराने के आदेश दिए थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक