विवाहित बहन को अनुकम्पा नियुक्ति से वंचित करने के खिलाफ याचिका
जोधपुर, 26 मई (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर कर विवाहित बहन को अनुकम्पा नियुक्ति से वंचित किए जाने को चुनौती दी गई है। याचिका पर प्रारम्भिक सुनवाई के बाद जस्टिस अरुण मोंगा ने अयाचियों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के आदेश
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जोधपुर, 26 मई (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर कर विवाहित बहन को अनुकम्पा नियुक्ति से वंचित किए जाने को चुनौती दी गई है। याचिका पर प्रारम्भिक सुनवाई के बाद जस्टिस अरुण मोंगा ने अयाचियों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं।

याचिकाकर्ता भीलवाड़ा जिले की ज्योति जोशी की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद और रजाक खान हैदर के ज़रिए दायर रिट याचिका में कहा गया याचिकाकर्ता के पिता का सेवाकाल के दौरान वर्ष 1996 में निधन हो गया था। उनके आश्रित के रूप में पुत्र यानी याचिकाकर्ता के भाई को अनुकम्पात्मक आधार पर नियुक्ति दी गई। यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि याचिकाकर्ता के भाई का भी वर्ष 2007 में असामयिक निधन हो गया। उस समय याचिकाकर्ता अविवाहित थी तथा अपने भाई पर आश्रित थी। बाद में विवाह हो जाने के आधार पर उसे अनुकम्पा नियुक्ति का लाभ देने से इनकार कर दिया गया।

याचिका में राज्य सरकार की 28 अक्टूबर 2021 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा गया है कि अविवाहित मृतक कर्मचारी की अविवाहित बहन को अनुकम्पा नियुक्ति का पात्र माना गया है, लेकिन विवाहित बहन को इससे बाहर रखना संविधान के समानता के सिद्धांत के विपरीत है।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि न्यायालय पूर्व में विवाहित पुत्रियों को अनुकम्पा नियुक्ति से वंचित करने वाले प्रावधानों को असंवैधानिक मान चुका है। ऐसे में केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर विवाहित बहन को लाभ से वंचित करना भेदभावपूर्ण और मनमाना है। मामले की प्रारम्भिक सुनवाई के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने अयाचियों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश