Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

नई दिल्ली, 26 मई (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने चंबल अभयारण्य में लगातार बढ़ रहे अवैध खनन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारों को प्रभावित इलाकों में सीसीटीवी कैमरे, कंट्रोल सेंसर और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने कहा कि ये काम युद्ध स्तर पर किया जाए और छह महीने के अंदर सभी निगरानी व्यवस्था पूरी तरह से चालू होनी चाहिए। इसके अलावा अवैध खनन में इस्तेमाल हो रहे वाहनों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने फर्जी नंबर प्लेट या बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों को जब्त कर कानूनी प्रक्रिया शुरु करने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि कार्रवाई केवल वाहन चालक पर ही नहीं, बल्कि वाहन मालिकों और ठेकेदारों पर भी होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में बिना नंबर और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों से अवैध रेत के परिवहन की मीडिया रिपोर्ट पर गौर करते हुए नाराजगी जताई और कहा कि अगर ये रिपोर्ट सही है तो अधिकारियों ने कोर्ट में गलत हलफनामा दाखिल किया है। इसके पहले 14 मई को उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर चिंता जताई थी कि खनन क्षेत्र में ट्रैक्टर्स और वाहनों के निर्बाध आवाजाही की पहचान नहीं की जा रही है।
कोर्ट ने अवैध खनन का परिवहन रोकने के लिए उठाये गए कदमों की विस्तृत जानकारी भी मांगी थी। 17 अप्रैल को चंबल अभ्यारण्य में अवैध खनन पर सख्त रवैया अपनाते हुए राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को हाई रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने और जीपीएस ट्रैकिंग करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने साफ किया था कि अगर अवैध खनन का कोई मामला सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे तुरंत कार्रवाई करें और मौके पर टीम भेजें और कठोर कदम उठाएं।
कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकारें ये सुनिश्चित करें कि अवैध खनन से प्रभावित इलाकों में ऊंचे खंभों पर हाई रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनकी लाइव फीड संबंधित जिले के एसपी या एसएसपी और संबंधित वन अधिकारी की सीधी निगरानी में रहे। कोर्ट ने आदेशों के उल्लंघन को अवमानना मानते हुए अफसरों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। पहले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मध्यप्रदेश के मुरैना में एक फॉरेस्ट गार्ड पर रेत माफिया द्वारा ट्रैक्टर ट्राली चढ़ा देने के मामले पर कड़ा एतराज जताया था। कोर्ट ने मध्यप्रदेश के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा था कि जब राज्य की मशीनरी अपने अधिकारियों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने में नाकाम है तो उसका क्या अस्तित्व है। अधिकारियों की नाक के नीचे अवैध खनन हो रहे हैं।
कोर्ट ने दो अप्रैल को चंबल नदी में अवैध खनन से वन्यजीवों को हो रहे नुकसान पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि खनन माफिया चंबल के नये डकैत हैं। कोर्ट ने कहा था कि राजस्थान में खनन माफिया पुलिस, वन और प्रशासनिक अधिकारियों की हत्या कर रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान सरकार के उस नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी, जिसमें चंबल अभयारण्य की 732 हेक्टेयर भूमि को संरक्षित क्षेत्र से बाहर करने की कोशिश की गई थी।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय--------------
हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह