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नई दिल्ली, 26 मई (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने विधानसभा और विधान परिषद सदस्यों को कैबिनेट का दर्जा दिए जाने के कर्नाटक सरकार के फैसले के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता से उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने की अनुमति दे दी।
याचिकाकर्ता सूरी पयाला कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ काम करते हैं। उन्होंने याचिका में कर्नाटक सरकार के 4 मार्च के आदेश को चुनौती दी है। कर्नाटक सरकार ने विभिन्न बोर्ड और निगमों के प्रमुख के रुप में विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों समेत 42 जनप्रतिनिधियों को कैबिनेट का दर्जा दिया है। याचिका में कहा गया था कि इन जनप्रतिनिधियों को कैबिनेट का दर्जा देने से उन्हें अधिक वेतन, सरकारी वाहन, चालक, ईंधन भत्ता, मकान किराया भत्ता जैसे वित्तीय लाभ मिलते हैं। ये लाभ के पद हैं और संविधान के अनुच्छेद 191 का उल्लंघन करते हैं।
कर्नाटक सरकार के इस फैसले को याचिकाकर्ता ने पहले कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि ये याचिका पूरी तरीके से जनहित में नहीं है। ये याचिका याचिकाकर्ता के कुछ पदों की चाहत को लेकर दायर की गई है, लेकिन याचिका में उन्होंने इसका पूरा खुलासा नहीं किया है।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह