स्वर्ण व्यवसायी हत्या मामले में गिरफ्तार प्रशांत बर्मन को मिली जमानत
कोलकाता, 26 मई (हि.स.)। सॉल्टलेक के स्वर्ण व्यवसायी स्वपन कामिल्या हत्याकांड से जुड़े मामले में गिरफ्तार राजगंज के हटाए गए बीडीओ प्रशांत बर्मन को मंगलवार शाम अदालत से जमानत मिल गई। बारासात अदालत ने उन्हें हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। मामले
प्रशांत बर्मन


कोलकाता, 26 मई (हि.स.)। सॉल्टलेक के स्वर्ण व्यवसायी स्वपन कामिल्या हत्याकांड से जुड़े मामले में गिरफ्तार राजगंज के हटाए गए बीडीओ प्रशांत बर्मन को मंगलवार शाम अदालत से जमानत मिल गई। बारासात अदालत ने उन्हें हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी।

मामले की सुनवाई के दौरान हत्या प्रकरण से संबंधित दस्तावेज अदालत में पेश नहीं किए जा सके। साथ ही जांच अधिकारी भी अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसी कारण पुलिस की गिरफ्त में आने के बावजूद प्रशांत को राहत मिल गई।

सरकारी वकील लाबण्य जना से इस संबंध में सवाल किया गया, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। वहीं प्रशांत बर्मन के वकील शिवप्रसाद मुखर्जी ने कहा कि जिस मामले में उनके मुवक्किल को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, वह जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि किसी अन्य मामले से जुड़े दस्तावेज अदालत में पेश नहीं किए गए।

वकील ने बताया कि सरकार पक्ष की ओर से अन्य मामलों का उल्लेख किया गया था, लेकिन संबंधित दस्तावेज या हिरासत की मांग अदालत में दाखिल नहीं की गई। इसके बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने लंबी सुनवाई के बाद जमानत मंजूर कर दी।

अधिवक्ता अनिर्वाण गुहा ठाकुरता ने कहा कि यदि किसी आरोपित के खिलाफ दूसरे मामले भी हों, तो संबंधित जांच एजेंसी को अदालत में गिरफ्तारी या हिरासत की औपचारिक अर्जी दाखिल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में समन्वय की कमी दिखी, जो आश्चर्यजनक है।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 29 अक्टूबर को न्यूटाउन थाना क्षेत्र के यात्रागाछी इलाके की खाल किनारे से सॉल्टलेक के दत्ताबाद निवासी स्वर्ण व्यवसायी स्वपन कामिल्या का शव बरामद किया गया था। आरोप है कि उनका अपहरण कर हत्या की गई थी। इस मामले में प्रशांत बर्मन को प्रमुख आरोपितों में शामिल किया गया था।

प्रशांत को पहले बारासात और विधाननगर महकमा अदालत से अग्रिम जमानत मिली थी। बाद में विधाननगर पुलिस ने उसके खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत रद्द करते हुए उन्हें आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। इसके बाद 23 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने भी आत्मसमर्पण का आदेश दिया था।

हालांकि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद भी वह लंबे समय तक पुलिस की पहुंच से बाहर रहे। अंततः गिरफ्तारी के बाद अब उन्हें जमानत मिल गई।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर