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कानपुर, 26 मई (हि.स.)। कानपुर के नजीराबाद निवासी और पुलिस आवास निर्माण निगम से रिटायर्ड जेई जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव से 95 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले पति-पत्नी को सेंट्रल जोन पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों ने खुद को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) का अधिकारी बताकर लैप्स (बंद) बीमा पॉलिसियों का पैसा वापस दिलाने का झांसा देकर घटना को अंजाम दिया था।
डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने नौकरी के दौरान करीब 28 बीमा पॉलिसियां कराई थीं। इनमें से 22 पॉलिसियां प्रीमियम जमा न होने के कारण लैप्स हो गई थीं। साल 2017 में उन्होंने इंटरनेट पर लैप्स पॉलिसियों का पैसा वापस पाने का तरीका खोजा। इसी दौरान उन्हें आरबीआई जैसी दिखने वाली एक फर्जी वेबसाइट और मोबाइल नंबर मिला। नंबर पर संपर्क करने पर आरोपित ने खुद को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का जनरल मैनेजर बताया और भरोसा जीतने के लिए फर्जी आरबीआई लेटर भी भेज दिया।
इसके बाद आरोपित ने अलग-अलग फीस, प्रोसेसिंग चार्ज और पॉलिसी एक्टिव कराने के नाम पर धीरे-धीरे नौ वर्षों में करीब 95 लाख रुपये अपने और पत्नी के बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए। काफी रकम देने के बावजूद जब पॉलिसियों का रिफंड नहीं मिला तो पीड़ित को शक हुआ और उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।
जांच के दौरान साइबर सेल स्वाट टीम और नजीराबाद पुलिस की टीम ने जाल बिछाकर आरोपित दंपति को जेके मंदिर नहरिया के पास से गिरफ्तार कर लिया। दोनों की पहचान सुल्तानपुर निवासी दीपक सिंह और उसकी पत्नी आंचल सिंह के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक दीपक इंटर पास है, जबकि उसकी पत्नी ने जीएनएम कोर्स किया है।
पुलिस जांच में सामने आया कि शातिर ने आरबीआई के नाम से फिशिंग वेबसाइट तैयार की थी। उसके पास से फोन, लैपटॉप, चेकबुक और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान आरोपित दीपक ने दावा किया कि रिटायर्ड जेई ने खुद उससे संपर्क किया था। उसने स्वीकार किया कि उसने खुद को आरबीआई मैनेजर बताकर पैसे लिए थे। आरोपित के मुताबिक पैर के ऑपरेशन के लिए उसे पैसों की जरूरत थी, इसलिए उसने यह रास्ता अपनाया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप