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जयपुर, 26 मई (हि.स.)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने नगर निगम को कहा है कि सफाई करने के लिए नियुक्त सफाई कर्मचारियों से दूसरे काम कराने के बजाय सफाई का काम ही कराए। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि निगम क्षेत्र में नियमित सफाई कराना निगम अधिकारियों का कर्तव्य है। अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिए की शहर में सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए खुले में कचरा फेंकने वालों पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई शुरु की जाए। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश विमल चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सफाई व्यवस्था की प्रक्रिया तय करते हुए सफाई की जाए और आवासीय कॉलोनियों के निकट उचित स्थान पर पर्याप्त डस्टबिन लगाकर उनकी नियमित सफाई की जाए। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि नियमित सफाई नहीं हुई तो संबंधित जमादार और स्वास्थ्य निरीक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी। अदालत ने कहा कि जयपुर शहर, हेरिटेज शहर है और इसे इस तरह साफ रखा जाए की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका उदाहरण पेश किया जा सके। अदालत ने शहरवासियों से भी अपील की है कि वह अपनी-अपनी कॉलोनियों को साफ रखने का प्रयास करें और इस संबंध में एनजीओ भी नगर निगम की मदद करें। अदालत ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन उद्योग, सबसे बड़ा उद्योग है। ऐसे में इस तरह के प्रयास प्रदेश के अन्य शहरों में भी किया जाए। अदालत ने प्रदेश के नगर निगमों को इस संबंध में निर्देश देने के लिए अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को जिम्मेदारी दी है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता विमल चौधरी ने कहा कि हाईकोर्ट ने सालों पहले नगर निगम को सफाई व्यवस्था को लेकर निगम को 16 बिंदुओं पर निर्देश जारी किए थे, लेकिन आज तक इनकी पालना नहीं हुई। यहां तक की नगर निगम में नियुक्त सफाई कर्मचारियों से सफाई के बजाए कार्यालय के दूसरे काम कराए जा रहे हैं। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस संबंध में निगम को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक