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प्रयागराज, 26 मई (हि.स)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत किसी अस्पताल का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार केवल जिला पंजीकरण प्राधिकरण को है, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को नहीं। अदालत ने सीएमओ द्वारा जारी अस्पताल सीलिंग और पंजीकरण रद्द करने के आदेश को अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया।
यह आदेश खुशी हॉस्पिटल की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने दिया। याचिका में 10 मार्च 2026 के सीलिंग आदेश और 18 मार्च 2026 के पंजीकरण निरस्तीकरण आदेश को चुनौती दी गई थी।
कोर्ट ने कहा कि अधिनियम की धारा 2(ए) और नियम 14(ए) के अनुसार पंजीकरण देना, नवीनीकरण करना, निलम्बित करना या रद्द करना जिला पंजीकरण प्राधिकरण का कार्य है। साथ ही धारा 32(2) के तहत पंजीकरण रद्द करने से पहले तीन माह का नोटिस देना अनिवार्य है।
अदालत ने कहा कि बिना नोटिस और अधिकार क्षेत्र के जारी आदेश कानून सम्मत नहीं हैं। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि भविष्य में नियमानुसार नोटिस और सुनवाई का अवसर देने के बाद ही कार्रवाई की जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे