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जगदलपुर, 25 मई (हि.स.)। जिले के बैलाडिला के पहाड़ियाें के पीछे बसे लावा गांव में पहली बार राशन उपलब्ध कराया गया। दशकों तक नक्सल हिंसा के कारण लावा गांव के ग्रामीणों को 35 किलो चावल लेने के लिए 45 किलोमीटर दूर हिरोली जाना पड़ता था। गांव के लोगों को विश्वास भी नहीं हो रह है कि हमारे गांव में राशन दुकान पहुंच गया।
दंतेवाड़ा कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव आज साेमवार काे 18 किलोमीटर पैदल चलकर दुर्गम जंगलों और पहाड़ियों की बीच बसे लावा गांव पहुंचे। ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्या सुनी और भरोसा दिलाया कि प्रशासन की मूलभूत सुविधा गांव तक पहुंचेगीं। उन्हाेने कहा कि शासन की योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। सरकार अब पहाड़ियों के पीछे बने गांव में पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि दशकों तक नक्सल हिंसा के कारण ये गांव शासन और विकास से दूर रहे। अब जब माओवाद का असर कम हुआ है, तब प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। जरूरत सिर्फ सड़क और राशन की नहीं, बल्कि भरोसा लौटाने की है। इन गांवों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, रोजगार और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं जल्द पहुंचाना जरूरी होगा, ताकि विकास की यह नई शुरुआत स्थायी बन सके।
गांव के प्रमुख आयते कुंजाम ने बताया कि सरकार और सरकार के लोग पहली बार हमारे गांव पहुंचे और हमारे समस्याओं का निराकारण करने का आश्वासन दिया है। पहले चरण में राशन दुकान प्रारंभ किया गया है।
विदित हो कि लौह अयस्क की विशाल पहाड़ियों और घने जंगलों के पीछे बसे लावा गांव, जहां दशकों तक सिर्फ नक्सलवाद का साया था, वहां अब पहली बार सरकार की मौजूदगी महसूस होने लगी है। बैलाडिला की लाल पहाड़ियों के पीछे रहने वाले आदिवासी परिवारों तक अब सरकारी योजनाएं पहुंच रही हैं। उन्हें अब पहली बार गांव में ही मुफ्त राशन मिलने लगा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे