मध्य प्रदेश में शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक गिरावट, 10 साल में 17 अंकों का सुधार
भोपाल, 21 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश ने शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक सुधार दर्ज करते हुए वर्ष 2014 के 52 से घटकर 2024 में 35 प्रति हजार जीवित जन्म तक पहुंच गया है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, डिजिटल नवाचार और नवजात देखभाल इकाइयों की मजबूती
फाइल फोटो


भोपाल, 21 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश ने शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक सुधार दर्ज करते हुए वर्ष 2014 के 52 से घटकर 2024 में 35 प्रति हजार जीवित जन्म तक पहुंच गया है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, डिजिटल नवाचार और नवजात देखभाल इकाइयों की मजबूती से यह उपलब्धि हासिल हुई है।

जनसंपर्क अधिकारी अंकुश मिश्रा ने गुरुवार को बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिये लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप मध्य प्रदेश ने शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट 2024 के अनुसार प्रदेश की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) वर्ष 2014 के 52 प्रति 1000 जीवित जन्म से घटकर वर्ष 2024 में 35 प्रति 1000 जीवित जन्म हो गई है। पिछले एक दशक में 17 अंकों की ऐतिहासिक कमी के साथ मध्यप्रदेश ने शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति को सशक्त बनाया है। यह उपलब्धि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, प्रभावी रणनीतियों एवं लक्षित हस्तक्षेपों की सफलता को प्रतिबिंबित करती है।

2014 से 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार वर्षवार शिशु मृत्यु दर में लगातार कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2014 में प्रति हजार जीवित जन्म पर शिशु मृत्यु दर 52 थी, जो 2015 में घटकर 50 हो गई। 2016 और 2017 में यह दर 47 रही, जबकि 2018 में मामूली बढ़कर 48 हो गई। इसके बाद 2019 में यह 46, 2020 में 43, 2021 में 41 और 2022 में 40 दर्ज की गई। आगे यह दर 2023 में घटकर 37 तथा 2024 में 35 प्रति हजार जीवित जन्म रह गई। कुल मिलाकर, इन वर्षों में शिशु मृत्यु दर में निरंतर सुधार देखने को मिला है।

जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिये 62 विशेष नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों (एसएनसीयू), 200 नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयों (एनबीएसयू) तथा मातृ-नवजात देखभाल इकाइयों (एमएनसीयू) का विस्तार किया गया है, जहाँ ज़ीरो सेपरेशन मॉडल के माध्यम से मां एवं नवजात की संयुक्त देखभाल, शीघ्र स्तनपान एवं कंगारू मदर केयर (केएमसी) को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि डिजिटल नवाचारों के अंतर्गत ई-शिशु (ई-शिशु) पहल के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों एवं जिला चिकित्सालयों की नवजात इकाइयों को विशेषज्ञ टेली-मेंटोरिंग से जोड़ा गया है। इस पहल को ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, दिल्ली एवं ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, रायपुर का तकनीकी एवं क्लिनिकल मेंटरिंग सहयोग प्राप्त हो रहा है। साथ ही अनमोल 2.0, एमपीसीडीएसआर, डीएसएस एवं एफबीएनसी सॉफ़्टवेयर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उच्च जोखिम मामलों की पहचान, नवजात निगरानी एवं डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को मजबूत किया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत