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पूर्वी सिंहभूम, 21 मई (हि.स.)। दक्षिण पूर्व रेलवे के क्षेत्रीय रेलवे प्रशिक्षण संस्थान (जेडआरटीआई) सिनी में गुरुवार को विभिन्न राज्यों से पहुंचे रेलकर्मियों के लिए सर्पदंश निवारण और नियंत्रण पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में रेलवे कर्मचारियों को जहरीले और विषहीन सांपों की पहचान, सर्पदंश के बाद प्राथमिक उपचार, बचाव के उपाय और अंधविश्वास से दूर रहने के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन टाटानगर रेल सिविल डिफेंस की ओर से किया गया। इसमें भारतीय रेलवे के बिलासपुर, खुर्दा, विशाखापट्टनम, चक्रधरपुर, रांची, आद्रा और खड़गपुर मंडलों से आए करीब 190 रेलकर्मियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में स्टेशन मैनेजर, ट्रेन मैनेजर, टावर वैन चालक और सहायक लोको पायलट शामिल थे।
रेल सिविल डिफेंस के इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने बताया कि रेलवे कर्मचारियों का कार्यक्षेत्र कई बार जंगलों और सुनसान इलाकों में होता है, जहां सर्पदंश का खतरा बना रहता है। ऐसे में समय पर सही जानकारी और प्राथमिक उपचार जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने पावर प्वाइंट प्रस्तुति और डमी सर्पों की मदद से जहरीले और विषहीन सांपों की पहचान, उनके शरीर की बनावट और काटने के निशानों के आधार पर विषैले सर्प की पहचान करने की विधि समझाई।
विशेषज्ञों ने बताया कि सांपों का जहर मुख्य रूप से न्यूरोटॉक्सिक, हेमोटॉक्सिक और मायोटॉक्सिक श्रेणी का होता है। इसके अलावा बताया गया कि भारत में लगभग 275 प्रजाति के सांप पाए जाते हैं, जिनमें केवल 15 प्रतिशत ही विषैले होते हैं। कई मामलों में सांप बिना जहर छोड़े भी काटते हैं, जिसे ड्राई बाइट कहा जाता है। इसलिए सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय मरीज का मनोबल बनाए रखना जरूरी है।
डेमोंस्ट्रेटर शंकर कुमार प्रसाद ने मॉक ड्रिल के माध्यम से घायलों को प्राथमिक उपचार देने और विभिन्न प्रकार की बैंडेज तकनीकों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में स्टेशन अधीक्षक विजय कुमार प्रसाद, वीरेंद्र कुमार और एसके बिस्वास ने इस प्रशिक्षण को रेलकर्मियों के लिए बेहद उपयोगी बताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक