सनातन की शक्ति संग संतों का संगम, कुंभ को दिव्य-भव्य बनाने पर अखाड़ा परिषद में मंथन
हरिद्वार, 20 मई (हि.स.)। धर्मनगरी हरिद्वार स्थित श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी में आज आध्यात्मिक एवं धार्मिक वातावरण के बीच महत्वपूर्ण संतों के बीच अध्यात्म पर चर्चा हुई। इस दौरान महामण्डलेश्वर कारौली शंकर महादेव तथा वैष्णवाचार्य पुण्डरीक गोस्वामी
चर्चा के दौरान


हरिद्वार, 20 मई (हि.स.)। धर्मनगरी हरिद्वार स्थित श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी में आज आध्यात्मिक एवं धार्मिक वातावरण के बीच महत्वपूर्ण संतों के बीच अध्यात्म पर चर्चा हुई। इस दौरान महामण्डलेश्वर कारौली शंकर महादेव तथा वैष्णवाचार्य पुण्डरीक गोस्वामी महाराज ने अखाड़े के सचिव एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज से शिष्टाचार भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर संत समाज के बीच सनातन धर्म, धार्मिक परंपराओं, कुंभ आयोजन तथा समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

अखाड़े में पहुंचे दोनों संतों का श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। वैदिक मंत्रोच्चार और संतों की उपस्थिति के बीच हुए इस विशेष धार्मिक वातावरण को और अधिक गरिमामय बना दिया। संतों ने कहा कि वर्तमान समय में सनातन संस्कृति और भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखना समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता, सेवा, सद्भाव और संस्कारों की रक्षा का माध्यम भी है।

बैठक के दौरान आगामी कुंभ मेला, कुंभ मेला और कुंभ मेला को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित बनाने को लेकर भी गंभीर मंथन किया गया। संतों ने कहा कि कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का विश्वस्तरीय महापर्व है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु देश-विदेश से शामिल होते हैं। ऐसे में कुंभ के आयोजन को आधुनिक सुविधाओं, स्वच्छता, सुरक्षा और आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न कराना सभी की जिम्मेदारी है।

श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज ने कहा कि अखाड़ा परिषद देशभर के संतों और धार्मिक संस्थाओं को एकजुट कर सनातन धर्म की मजबूती के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि नई पीढ़ी अपने धर्म और संस्कृति से जुड़ी रहेगी तो देश की आध्यात्मिक पहचान और अधिक सशक्त होगी।

महामण्डलेश्वर कारौली शंकर महादेव ने कहा कि संत समाज सदैव राष्ट्र और समाज के कल्याण के लिए कार्य करता आया है। उन्होंने कहा कि आज विश्व में भारतीय संस्कृति और सनातन विचारधारा के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है, जिसे और अधिक विस्तार देने की आवश्यकता है। वहीं वैष्णवाचार्य पुण्डरीक गोस्वामी महाराज ने कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और नैतिक मूल्यों का प्रसार होता है।

बैठक में उपस्थित संतों ने सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, गंगा स्वच्छता तथा धार्मिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर भी अपने विचार रखे। संतों ने कहा कि धर्म और समाज सेवा एक-दूसरे के पूरक हैं तथा समाज के कमजोर वर्गों की सहायता करना भी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कार्यक्रम के अंत में सभी संतों ने देश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए सनातन धर्म की रक्षा और प्रचार-प्रसार के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला