Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

बिना तलाक नाता प्रथा से दूसरी शादी पर हाईकोर्ट की फटकार, फैमिली कोर्ट का निर्णय बरकरार
जोधपुर, 20 मई (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने बिना कानूनी तलाक लिए नाता प्रथा के जरिए दूसरी शादी करने और फिर पहली पत्नी से तलाक मांगने वाले एक पति की अपील को खारिज कर दिया। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने एक रिपोर्टेबल फैसले में राजसमंद की फैमिली कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना तलाक दूसरी शादी शून्य है और इसे कोई कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती।
दरअसल राजसमंद जिले के आमेट स्थित लाडवा सरदारगढ़ निवासी अपीलार्थी पति रामलाल (बदला हुआ नाम) की शादी 5 मई 1992 को भीलवाड़ा निवासी पार्वती के साथ हुई थी। दोनों ही सरकारी टीचर हैं। शादी के कुछ साल बाद 1997 में दोनों की पोस्टिंग अलग-अलग जगह हो गई, जिसके कारण पत्नी बच्चों के साथ अलग रहने लगी। इसी दौरान 1997 में ही पति ने बिना तलाक लिए अनिता (बदला हुआ नाम) नाम की एक अन्य महिला के साथ नाता कर लिया और दूसरी महिला को पत्नी की तरह अपने साथ रखकर तीन बच्चे किए। पति ने अपनी इस गलती को खुलेआम स्वीकारते हुए आधार कार्ड में भी पत्नी के रूप में अनिता का नाम दर्ज करवा लिया। इसके बावजूद, पति ने राजसमंद फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाते हुए दावा किया कि उसकी पहली पत्नी ने बिना कारण उसको छोड़ दिया है और लंबे समय तक अलग रहकर क्रूरता की है। गत 24 मई 2023 को पारिवारिक अदालत ने पति की यह अर्जी खारिज कर दी थी।
हाईकोर्ट में पति के वकील ने तर्क दिया कि पत्नी ने 2021 में दहेज प्रताडऩा का मुकदमा दर्ज करवाया था, जिसमें पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी थी। इसे पति ने मानसिक क्रूरता बताया। वहीं, पत्नी के वकील ने तर्क दिया कि पति ने दूसरी महिला के साथ नाता किया, जिसके कारण ही पत्नी को अलग रहने पर मजबूर होना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि जब पति खुलेआम दूसरी महिला को पत्नी मानकर रह रहा है, तो पहली पत्नी द्वारा साथ रहने से इनकार करना या पुलिस में शिकायत करना क्रूरता नहीं, बल्कि एक न्यायोचित प्रतिक्रिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पहली पत्नी से तलाक लिए बगैर दूसरी शादी शून्य है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश