विधि परीक्षा के मूल्यांकन में लापरवाही के खिलाफ अभाविप का प्रदर्शन
लखनऊ, 20 मई (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) लखनऊ महानगर के नेतृत्व में बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के विधि (लॉ) विद्यार्थियों की परीक्षा और मूल्यांकन में हुई घोर लापरवाही के विरोध में विश्वविद्यालय परिसर में
अभाविप का प्रदर्शन


लखनऊ, 20 मई (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) लखनऊ महानगर के नेतृत्व में बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के विधि (लॉ) विद्यार्थियों की परीक्षा और मूल्यांकन में हुई घोर लापरवाही के विरोध में विश्वविद्यालय परिसर में एक विशाल विरोध-प्रदर्शन किया गया। सैकड़ों आक्रोशित छात्रों और कार्यकर्ताओं के भारी दबाव के बीच अभाविप के प्रतिनिधिमंडल ने परीक्षा नियंत्रक डॉ. विद्यानंद त्रिपाठी को एक मांगपत्र सौंपा। छात्रशक्ति के इस ऐतिहासिक और उग्र आंदोलन के परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय प्रशासन को अंततः झुकना पड़ा और प्रशासन ने अभाविप की सभी प्रमुख माँगों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार करते हुए इस पर आगामी आवश्यक कार्यवाही तत्काल संचालित कर दी है।

अभाविप ने स्पष्ट किया है कि परिषद अपने स्थापना काल से ही प्रवेश, परीक्षा, शुल्क और परिणाम में आने वाली हर अनियमितता के स्थायी समाधान और छात्र हितों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रही है और आगे भी रहेगी।

अभाविप, अवध प्रांत के प्रांत मंत्री अर्पण कुशवाहा ने विश्वविद्यालय प्रशासन को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि विधि जैसे गंभीर विषय के परीक्षा परिणामों में इतनी बड़ी अनियमितता और लापरवाही सीधे तौर पर हजारों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अभाविप इस तानाशाही और लचर मूल्यांकन प्रणाली को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों और एनएलयू की तर्ज पर यहाँ भी मूल्यांकन में सुधार करना होगा, ताकि छात्रों की प्रतिभा के साथ न्याय हो सके। आज हमारी एकजुटता ने प्रशासन को झुकने पर मजबूर किया है, और जब तक हर एक छात्र को न्याय नहीं मिल जाता, हमारी निगरानी जारी रहेगी।

अभाविप लखनऊ महानगर की महानगर मंत्री कु. सरिता पाण्डेय ने कहा कि प्रथम सेमेस्टर के अंकों में हुई विसंगतियों की निष्पक्ष जाँच, कॉपियों का अनुभवी प्रोफेसरों से पुनर्मूल्यांकन और पुनः 70-30 की प्रणाली को लागू कराना हमारी मुख्य प्राथमिकता है। जब तक प्रथम सेमेस्टर का रिजल्ट पूरी तरह त्रुटिहीन नहीं हो जाता, तब तक द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षा फॉर्म की तारीख को आगे बढ़ाना ही होगा। आज छात्रों के आक्रोश के आगे प्रशासन ने माँगें मानी हैं, जो छात्र शक्ति की बहुत बड़ी जीत है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्‍द्र पाण्डेय