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नई दिल्ली, 14 मई (हि.स.)। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित जगप्रसिद्ध लोणार सरोवर नगरी के प्राचीन दैत्यसूदन मंदिर में 15 मई से 'किरणोत्सव' का आयोजन होगा। शुक्रवार से अगले पांच दिनों तक इस मंदिर में भगवान विष्णु के अवतार दैत्यसूदन के 'श्री' के चरणों में सूर्यकिरण अभिषेक होगा। इन पांच दिनों के दौरान दोपहर 11 से 1 बजे के बीच सूर्य की किरणें सीधे भगवान दैत्यसूदन की मूर्ति का अभिषेक करती नजर आएंगी। प्राचीन इंजीनियरिंग के इस चमत्कार को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटेंगे। यह किरणोत्सव चार से पांच दिनों तक चलेगा।
स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने पुरातत्व विभाग से मांग की है कि यहां आने वाले भक्तों के लिए पीने के पानी और धूप से बचने के लिए छाया की उचित व्यवस्था की जाए। लोणार के रहने वाले नंदू भाऊ ने बताया कि किरणोत्सव के कारण शहर में पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय व्यवसायियों को भी लाभ होने की उम्मीद है। इस अद्भुत क्षणों के साक्षी बनने लोग दूर दूर से आते हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ऐतिहासिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए इसको लेकर प्रशासन के द्वारा सभी इंतजाम किए जाने चाहिए।
उल्लेखनीय है कि लोणार शहर अपने प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। विश्व प्रसिद्ध लोणार सरोवर और उसके आसपास कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं। उन्हीं में से एक है सुंदर नक्काशी वाला प्राचीन दैत्यसूदन मंदिर है जो करीब 1000 साल पुराना है। इस मंदिर की वास्तुकला सीधे कोणार्क के सूर्य मंदिर से मेल खाती है। कई हजार वर्ष पहले अंतरिक्ष से गिरे उल्का पींड की वजह से लोणार में उल्का झील का निर्माण हुआ। इसी झील के पास दैत्यसूदन मंदिर है जो वर्ष 1878 में दूसरी बार दुनिया के सामने आया। क्योंकि इससे पहले यह मंदिर मिट्टी के ढेर के नीचे दबा हुआ था, बाहर से किसी अनियमित तारे की तरह दिखाई देने वाला यह मंदिर बेहद प्राचीन और सुंदर कलात्मकता का उदाहरण है। हेमांडपंथी शैली से निर्मित इस मंदिर के चारों ओर नक्काशीदार खंभे हैं। इस मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर से निर्मित शस्त्रधारी भगवान विष्णु और उनके पैरों के नीचे दबे लवणासुर नामक राक्षस की मूर्ति है। जिसका भगवान विष्णु द्वारा वध किया जा रहा है। मंदिर के निर्माण में वास्तुशास्त्र व खगोलशास्त्र का विशेष तौर पर ध्यान रखे जाने के चलते प्रतिवर्ष मई माह के दौरान 5 दिन इस मंदिर में सूर्य किरणों द्वारा अभिषेक किया जाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी