युद्ध अब सिर्फ युद्ध नहीं रहे!
परिचय दास कभी युद्ध का अर्थ सीधा था—दो सेनाएँ, दो सीमाएँ और बीच में धूल, धुआँ, बारूद। तलवारें टकराती थीं तो आवाज़ दूर तक जाती थी। किसी नगर पर धावा होता था तो आकाश तक उसकी खबर पहुँचती थी। युद्ध दिखता था, सुनाई देता था और उससे डरना भी आसान था। अब य

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