अंत्योदय से आत्मनिर्भरता तक : जनकल्याण की धारा में बहता नया भारत
भाजपा के स्थापना दिवस (6 अप्रैल) पर विशेष – डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारतीय लोकतंत्र के व्यापक और जीवंत परिदृश्य में भारतीय जनता पार्टी अपने वैचारिक मूल्यों, विशेष तौर पर अंत्योदय, सुशासन और ‘राष्ट्र प्रथम’ को व्यवहार में उतारते हुए जनकल्याण की एक निर
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी


भाजपा के स्थापना दिवस (6 अप्रैल) पर विशेष

– डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भारतीय लोकतंत्र के व्यापक और जीवंत परिदृश्य में भारतीय जनता पार्टी अपने वैचारिक मूल्यों, विशेष तौर पर अंत्योदय, सुशासन और ‘राष्ट्र प्रथम’ को व्यवहार में उतारते हुए जनकल्याण की एक निरंतर प्रवाहित धारा के रूप में जानी जाती है। वर्ष 2014 के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा विभिन्न राज्यों में भाजपा सरकारों ने शासन की कार्यशैली को मूलतः परिवर्तित किया है। विकास अब योजनाओं की घोषणा से आगे परिणाम आधारित प्रशासन का पर्याय बन चुका है, जिसका प्रभाव देश के सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक ढांचे पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

यदि आज देश के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन करें तो यही दिखाई देता है कि भाजपा की शासन प्रणाली का केंद्र बिंदु समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की पहुंच सुनिश्चित करना है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने जिस ‘अंत्योदय’ की अवधारणा प्रस्तुत की थी, वह आज मूर्त रूप में दिखाई देती है। इसी उद्देश्य से प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री जनधन योजना ने वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की है। वर्ष 2025-26 तक इस योजना के अंतर्गत 50 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों में जमा राशि दो लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है।

आज यह पहल सिर्फ बैंकिंग सुविधा तक सीमित न होकर इसने गरीबों को आर्थिक मुख्यधारा में लाने का कार्य किया है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से अब तक 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। कहना होगा कि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

गरीब कल्याण की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों ने समाज के वंचित वर्गों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 2026 तक 10 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं (स्रोत: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, 2026)। इस योजना ने महिलाओं को धुएं से मुक्त रसोई प्रदान कर उनके स्वास्थ्य और सम्मान दोनों की रक्षा की है। इसी प्रकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2025 तक तीन करोड़ से अधिक पक्के घरों का निर्माण या स्वीकृति दी जा चुकी है। जिससे गरीब परिवारों को स्थायित्व और सुरक्षा का आधार मिला है। स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत 11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया और देश को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया, जिसने स्वच्छता को एक सामाजिक आंदोलन का रूप दिया।

इसी तरह से कृषि क्षेत्र में भी सरकार की नीतियों ने व्यापक प्रभाव डाला है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत 2026 तक 11 करोड़ से अधिक किसानों को प्रतिवर्ष 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इस योजना के तहत अब तक 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है (स्रोत: पीएम-किसान पोर्टल, 2026)। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से सिंचित क्षेत्र का विस्तार हुआ है और जल प्रबंधन को सुदृढ़ किया गया है। सॉयल हेल्थ कार्ड योजना के अंतर्गत 22 करोड़ से अधिक कार्ड वितरित किए जा चुके हैं, जिससे किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने में सहायता मिली है। फसल बीमा योजना के तहत करोड़ों किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के समय आर्थिक सुरक्षा प्रदान की गई है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी सरकार की पहलें उल्लेखनीय रही हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के परिणामस्वरूप लिंगानुपात में सुधार हुआ है और बालिका शिक्षा में वृद्धि दर्ज की गई है। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 03 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जो बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। तीन तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त कर मुस्लिम महिलाओं को न्याय और समान अधिकार प्रदान किया गया, जो सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसके अतिरिक्त ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के माध्यम से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त बनाने का प्रयास किया गया है।

इसके साथ ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष्मान भारत योजना ने गरीबों के लिए जीवन रक्षक कवच का कार्य किया है। 2026 तक इस योजना के अंतर्गत 50 करोड़ से अधिक लोगों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जा रहा है (स्रोत: राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, 2026)। अब तक 06 करोड़ से अधिक अस्पताल में भर्ती उपचार इस योजना के तहत किए जा चुके हैं, जिससे करोड़ों परिवारों को आर्थिक संकट से बचाया गया है। साथ ही, देशभर में 1.5 लाख से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं, जोकि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रहे हैं।

डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत भारत ने डिजिटल क्रांति का नेतृत्व किया है। 2025-26 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से प्रति माह 1500 करोड़ से अधिक लेनदेन दर्ज किए जा रहे हैं (स्रोत: एनपीसीआई, 2026)। यह भारत को विश्व का अग्रणी डिजिटल भुगतान राष्ट्र बनाता है। मेक इन इंडिया पहल के तहत भारत मोबाइल निर्माण में वैश्विक स्तर पर शीर्ष देशों में शामिल हो चुका है। स्किल इंडिया मिशन के माध्यम से 1.5 करोड़ से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिससे रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। भारतमाला परियोजना के अंतर्गत 35,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से बड़ी संख्या में परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। रेलवे के आधुनिकीकरण के तहत वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार हुआ है और 2026 तक 75 से अधिक रूटों पर इनका संचालन किया जा रहा है (स्रोत: भारतीय रेलवे, 2026)। ‘उड़ान’ योजना के तहत 500 से अधिक हवाई मार्ग शुरू किए गए हैं, जिससे छोटे शहरों को हवाई संपर्क मिला है। ग्रामीण विद्युतीकरण के अंतर्गत लगभग सभी गांवों तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है।

देखने में आ रहा है कि ग्रामीण विकास के क्षेत्र में जल जीवन मिशन एक क्रांतिकारी पहल बनकर उभरा है। 2026 तक 14 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया जा चुका है। यह पहल ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता को सुधारने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुई है। वहीं, शहरी क्षेत्रों में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 100 शहरों में आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है (स्रोत: आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय)।

इन सभी प्रयासों में एक समान सूत्र स्पष्ट रूप से दिखाई देता है; सुशासन, पारदर्शिता और जनभागीदारी। तकनीक के उपयोग, डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से सरकार ने योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया है। जनसहभागिता के माध्यम से इन योजनाओं को जनआंदोलन का स्वरूप दिया गया है, जिससे उनकी सफलता और प्रभावशीलता दोनों में वृद्धि हुई है।

अत: आज इस संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी को उसके स्थापना समय से लेकर अब तक यदि समग्र रूप से याद किया जाए तो कहना यही होगा कि भाजपा सरकार की योजनाएं सिर्फ विकास के आंकड़ों तक सीमित नहीं रही हैं, वे समाज के प्रत्येक वर्ग को सशक्त बनाने का माध्यम बनी हैं। ये योजनाएं एक ऐसे भारत की नींव रख रही हैं, जोकि आत्मनिर्भर, समावेशी और सशक्त है। अंत्योदय की भावना से प्रेरित यह विकास यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है, जिसमें लक्ष्य आर्थिक उन्नति के साथ ही सामाजिक न्याय और सभी के लिए समान अवसर हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी