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शिमला, 06 मार्च (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के आठ प्रमुख होटलों को आउटसोर्सिंग के जरिए निजी ऑपरेटरों को सौंपने का प्रदेश सरकार का कदम सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार की “हिमाचल ऑन सेल” की नीति है।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार राज्य के बहुमूल्य संसाधनों को निजी हाथों में सौंप रही है और जनसंपदा को अपने “मित्रों” को लाभ पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि देवभूमि हिमाचल की जमीन, पहचान और संसाधनों की रक्षा के लिए बनाए गए हिमाचल प्रदेश भू सुधार एवं किराएदारी अधिनियम 1972 की धारा 118 में छूट देने के नाम पर सरकार पहले ही “हिमाचल ऑन सेल” की मुहिम चला रही है और अब पर्यटन निगम के होटल भी इसमें शामिल कर लिए गए हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष पहले ही आशंका जता चुका था कि सरकार जानबूझकर राज्य के सुचारू रूप से चल रहे और लाभ देने वाले होटलों को कमजोर कर उन्हें निजी क्षेत्र को सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि उस समय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ऐसा नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन अब सामने आए पर्यटन विभाग के पत्र संख्या OP/O&M/TDC/26 से साफ हो गया है कि सरकार इस दिशा में कदम बढ़ा चुकी है।
जयराम ठाकुर के अनुसार पर्यटन विभाग की सूची में बिलासपुर का होटल लेक-व्यू, चिंडी का होटल ममलेश्वर, फागू का होटल एप्पल ब्लॉसम, रोहड़ू का होटल चांशल, कुल्लू का होटल सर्वरी, कसौली का होटल ओल्ड रॉसकॉमन, परवाणू का होटल शिवालिक और खड़ापत्थर का होटल गिरिगंगा शामिल हैं। उनका कहना है कि इन होटलों को ऑपरेशन और मेंटेनेंस के आधार पर निजी कंपनियों को आउटसोर्स करने की मंजूरी दी गई है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “व्यवस्था परिवर्तन” का नारा देने वाली सरकार अब हिमाचल को बेचने की राह पर चल पड़ी है। जयराम ठाकुर ने कहा कि अगर ये होटल निजी हाथों में दिए जाते हैं तो इससे राज्य के राजस्व को लंबे समय में नुकसान होगा और पर्यटन निगम के कर्मचारियों के भविष्य पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगेंगे।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार घाटे का बहाना बनाकर प्राइम लोकेशन पर स्थित इन संपत्तियों को अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए कम कीमत पर लीज पर देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने इसे हिमाचल की जनता के साथ विश्वासघात बताते हुए कहा कि राज्य की सार्वजनिक संपत्तियों को इस तरह निजी हाथों में सौंपना उचित नहीं है।
जयराम ठाकुर ने चेतावनी दी कि विपक्ष इस फैसले का विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल की अस्मिता और संसाधनों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस मुद्दे को सदन से लेकर सड़क तक जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा