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रांची, 03 मार्च (हि.स.)। कुड़मी (महतो) समाज ने झारखंड में इस समाज को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने तथा कुड़मी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान देने की मांग को लेकर हाल में आयोजित कार्यक्रमों पर गंभीर मंथन की जरूरत बताई है।
समाज की ओर से मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि इस उद्देश्य से दो प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। पहला कार्यक्रम 20 सितंबर 2025 को ‘रेल टेका’ के रूप में और दूसरा 01 मार्च को ‘कुड़मी अधिकार महारैली’ के रूप में आयोजित किया गया।
विज्ञप्ति में कहा गया कि इन दोनों कार्यक्रमों से समाज को क्या हासिल हुआ और क्या नुकसान हुआ, इस पर गहराई से विचार किया जाना चाहिए। समाज के अनुसार ‘रेल टेका’ कार्यक्रम से जागरूकता तो बढ़ी, लेकिन समाज को असंवैधानिक और घृणित व्यवहार का सामना भी करना पड़ा। इसके बावजूद राज्य और केंद्र सरकार की ओर से किसी प्रकार का स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला।
‘कुड़मी अधिकार महारैली’ के संदर्भ में कहा गया कि कई सामाजिक संगठनों ने समाज को जागृत करने का प्रयास किया, लेकिन अधिकांश संगठनों को कथित रूप से दबाव और ब्लैकमेल का सामना करना पड़ा। समाज ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग समाज का राजनीतिकरण करने और कुरमी तथा कुड़मी के बीच दरार डालने का प्रयास कर रहे हैं, जो समाज के हित में नहीं है।
समाज ने अपने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और युवाओं से अपील की है कि वे इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करें और एकजुट होकर समाज के हित में निर्णय लें।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak