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जम्मू, 13 मार्च (हि.स.)। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सांबा में हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान (एचएफआरआई) शिमला द्वारा प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैम्पा) के वित्तपोषण से किसानों के लिए “कृषि फसलों एवं औषधीय पौधों की जैविक खेती” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जैविक खेती, औषधीय पौधों के उत्पादन और सतत कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. जोगिंदर सिंह चौहान ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को कृषि फसलों और औषधीय पौधों की जैविक खेती की उन्नत तकनीकों से अवगत कराना है। उन्होंने शिवालिक क्षेत्र के महत्वपूर्ण औषधीय पौधों के सतत दोहन पर विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. मनीषा थपलियाल, निदेशक एचएफआरआई शिमला ने संस्थान के अनुसंधान एवं विकास कार्यों की जानकारी देते हुए जल स्रोतों के संरक्षण और कृषि विविधीकरण के महत्व पर जोर दिया। वहीं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संदीप शर्मा ने भूमि के संतुलित उपयोग, कृषि भूमि में वृक्षारोपण, ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन और प्राकृतिक खेती के लाभों पर प्रकाश डाला।
केवीके सांबा के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजय खजुरिया ने किसानों को जैविक खेती के माध्यम से सतत उत्पादन और अतिरिक्त आय के लिए कद्दू को मध्यवर्ती फसल के रूप में उगाने की तकनीक समझाई। डॉ. अश्वनी तपवाल ने जैव उर्वरक और जैव फफूंदनाशकों की भूमिका पर जानकारी दी जबकि डॉ. शालिनी खजुरिया ने अंतरफसल के रूप में उगाई जाने वाली सब्जियों की उन्नत खेती तकनीकों पर प्रकाश डाला। इस दौरान केवीके सांबा और केवीके रामबन के वैज्ञानिकों ने ड्रोन के माध्यम से जैव उर्वरक के प्रयोग का प्रदर्शन भी किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में सांबा जिले के लगभग 50 किसानों ने भाग लेकर जैविक खेती और औषधीय पौधों के उत्पादन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा