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नैनीताल, 20 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने डिप्लोमा इंजीनियरों की स्पेशल अपील को खारिज करते हुए चारधाम यात्रा, विशेषकर केदारनाथ धाम यात्रा में लगाई गई उनकी ड्यूटी को सही ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारियों को सेवा की अनिवार्यताओं और जनहित के अनुसार सौंपे गए कर्तव्यों का पालन करना होगा।
शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष डिप्लोमा इंजीनियरों की स्पेशल अपील पर सुनवाई हुई। मामले के अनुसार उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वे लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग में कार्यरत हैं। याचिका में कहा कि डिप्लोमा इंजीनियर, जो तकनीकी विशेषज्ञ हैं, उन्हें स्वच्छता जैसे कार्यों में लगाया जा रहा है जो उनके कार्यक्षेत्र और अनुभव से बाहर है। उनकी यह याचिका पूर्व में एकलपीठ ने खारिज कर दी थी। जिसे याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी थी।
खंडपीठ ने डिप्लोमा इंजीनियरों के दावों की गहराई से जांच की और पाया कि 5 अप्रैल 2023 के सरकारी आदेश के अनुसार, इंजीनियरों को स्वच्छता कार्य नहीं सौंपा गया है। वास्तव में, उन्हें यात्रा मार्ग पर भूस्खलन को रोकने और पैदल मार्गों की मरम्मत जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि स्वच्छता और अन्य संबंधित कार्यों के लिए सुलभ इंटरनेशनल, नगर निकायों और नगर पालिकाओं के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। अपीलकर्ता अदालत के समक्ष ऐसा कोई भी प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकें जिससे यह साबित हो सके कि किसी भी डिप्लोमा इंजीनियर को स्वच्छता कार्य में लगाया गया है। खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि केदारनाथ धाम यात्रा की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करें। ऐसे में सरकार के पास यह अधिकार है कि वह आवश्यकतानुसार अपने कर्मचारियों को विशिष्ट ड्यूटी पर तैनात कर सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / लता