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हुगली, 20 फ़रवरी (हि. स.)। ‘बच्चा चोर’ होने की अफवाह के आधार पर मां-बेटी और उनके वाहन चालक को जिंदा जलाकर मारने की कोशिश के मामले में हुगली के चूंचुड़ा फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 25 आरोपितों को दोषी ठहराते हुए दो को आजीवन कारावास और शेष 23 को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। शुक्रवार को न्यायाधीश पीयूषकांति राय ने सजा की घोषणा की।
यह घटना 21 जनवरी 2017 को हुगली जिले के बलागढ़ थाना क्षेत्र के आसनपुर गांव में हुई थी। ‘बच्चा चोर’ होने के संदेह में कुछ लोगों ने एक मां-बेटी और उनके वाहन चालक को घेर लिया और बेरहमी से मारपीट की। आरोप है कि उनकी गाड़ी में आग लगा दी गई और तीनों को जिंदा जलाने की कोशिश की गई, जिससे पूरा इलाका हिंसा की चपेट में आ गया। स्थिति नियंत्रित करने पहुंची पुलिस पर भी भीड़ ने हमला किया। इस दौरान एक सिविक वॉलंटियर तीर लगने से घायल हो गया, जबकि कुल 11 पुलिसकर्मी जख्मी हुए।
सरकारी पक्ष की ओर से अदालत में 27 गवाह पेश किए गए। सभी साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने 25 आरोपितों को दोषी करार दिया। इनमें गोपाल राय और पूर्णिमा मल्लिक को आजीवन कारावास, जबकि अन्य 23 दोषियों को सात-सात साल की सजा सुनाई गई।
मुख्य सरकारी वकील शंकर गांगुली ने कहा कि एक ही मामले में 25 दोषियों को एक साथ सजा सुनाया जाना न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मिसाल है। वहीं, सरकारी वकील जयंत साहा ने कहा कि पुलिस ने हमले के बावजूद कर्तव्य निभाते हुए पीड़ितों को बचाने का प्रयास किया और निष्पक्ष जांच कर चार्जशीट दाखिल की, जिसके आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय