Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

जौनपुर, 20 फरवरी (हि.स.)। यूपी के जौनपुर में 26 वर्ष पुराने बहुचर्चित प्रकरण में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय (एमपी-एमएलए कोर्ट) अनुज कुमार जौहर की अदालत ने पूर्व सदर विधायक सुरेंद्र प्रताप सिंह सहित छह आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में शुक्रवार को दोषमुक्त कर दिया।
विचारण के दौरान सातवें आरोपित विनय कुमार की मृत्यु हो चुकी थी। मामला वर्ष 2000 का है। तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक कोतवाली ए.के. सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि 1 फरवरी 2000 को सुरेंद्र प्रताप सिंह के साथ संजय पाठक, सूबेदार सिंह, भूपेंद्र सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह और गुलाब चंद पांडेय के नेतृत्व में लगभग सौ-सवा सौ अज्ञात लोग जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए कचहरी की ओर से ओलंदगंज पहुंचे और सरायपोख्ता पुलिस चौकी में घुस गए। आरोप था कि भीड़ ने कॉन्स्टेबल सुनील और रामबहादुर को तलाशा, न मिलने पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया तथा दुकानों को बंद कराते हुए तोड़फोड़ की। इस दौरान एक सरकारी जीप के क्षतिग्रस्त होने की भी बात कही गई थी।
बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि विवेचना के दौरान कई लोगों के नाम व पते गलत दर्ज किए गए। न्यायालय द्वारा नोटिस जारी होने पर यह तथ्य सामने आया कि कुछ नाम-पते अस्तित्व में ही नहीं थे। मामले में चार गवाहों का परीक्षण हुआ, किंतु वे घटना के आरोपों की पुष्टि नहीं कर सके। दोनों पक्षों की बहस सुनने और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता दुष्यंत सिंह ने पैरवी की।
हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव