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प्रयागराज, 20 फरवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने किसी भी प्रक्रिया और सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना बेदखली का आदेश करने के लिए कौशाम्बी के अलवारा गांव की भूमि प्रबंधक समिति के सचिव को उपस्थित होने और यह बताने का निर्देश दिया है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के लिए राज्य सरकार को क्यों नहीं भेजा जाना चाहिए। साथ ही याची को जारी नोटिस के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पडिया ने अमर सिंह की याचिका पर उनके अधिवक्ता और अलवारा भूमि प्रबंधक समिति के अधिवक्ता आजाद राय को सुनकर दिया है। याची की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बिना किसी प्रक्रिया शुरू किए गत 21 जनवरी को अलवारा की भूमि प्रबंधक समिति के सचिव ने याची को तीन दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने का निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया। कहा गया कि नोटिस से पहले याची को अपना जवाब प्रस्तुत करने का भी कोई अवसर नहीं दिया गया।
कोर्ट ने रिकॉर्ड के अवलोकन पर पाया कि भूमि प्रबंधक समिति के सचिव द्वारा की गई कार्रवाई न केवल अवैध है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूर्ण उल्लंघन है। क्योंकि यूपी राजस्व संहिता 2006 के तहत कोई प्रक्रिया शुरू किए बिना बेदखली का आदेश नहीं किया जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे