उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रवक्ताओं के चयन वेतनमान पुनर्निर्धारण आदेश पर लगाई अंतरिम रोक
नैनीताल, 09 जनवरी (हि.स.)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत प्रवक्ताओं के चयन वेतनमान के पुनर्निर्धारण संबंधी 18 दिसंबर 2025 के सरकारी आदेश पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले में अप्रैल माह की तिथि नियत करते
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रवक्ताओं के चयन वेतनमान पुनर्निर्धारण आदेश पर लगाई अंतरिम रोक


नैनीताल, 09 जनवरी (हि.स.)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत प्रवक्ताओं के चयन वेतनमान के पुनर्निर्धारण संबंधी 18 दिसंबर 2025 के सरकारी आदेश पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले में अप्रैल माह की तिथि नियत करते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी एवं न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। याचिका सुशील तिवारी, धीरेंद्र मिश्रा, विनोद पैन्यूली, शंकर बोरा सहित अन्य प्रवक्ताओं ने दाखिल की। याचिकाकर्ताओं ने सरकारी सेवक वेतन नियमावली (प्रथम संशोधन) 2025 तथा वित्त सचिव द्वारा 18 दिसंबर 2025 को जारी चयन वेतनमान पुनर्निर्धारण आदेश को चुनौती दी।

याचिका में कहा गया है कि प्रवक्ताओं व सहायक अध्यापक एलटी ग्रेड को 2026 की सरकारी सेवक वेतन नियमावली 2016 के अनुसार चयन वेतनमान व प्रोन्नत वेतनमान देते समय एक इंक्रीमेंट देय है लेकिन राज्य सरकार की ओर से उस नियमावली में संसोधन करते हुए सरकारी सेवक वेतन नियमावली प्रथम संसोधन 2025 का प्राख्यापन करते हुए इसे भूतलक्षी प्रभाव 1 जनवरी 2016 से लागू कर दिया गया हैं जिसके अनुसार अब चयन/प्रोन्नत वेतनमान के समय प्रदत्त एक इंकीमेंट को समाप्त कर दिया है साथ ही वित्त सचिव द्वारा 18 दिसंबर 2025 को आदेश जारी करते हुए चयन/प्रोन्नत वेतनमान का पुनर्निर्धारण , संसोधित नियमावली 2025 के अनुसार करने के लिए आदेश जारी किया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा किए गए संसोधन केवल शैक्षिक संवर्ग के कर्मचारियों पर लागू किया गया है और राज्य सरकार 2016 की वेतन नियमावली के अनुसार चयन/प्रोन्नत वेतनमान में देय एक इंक्रीमेंट को भूतलक्षी प्रभाव से समाप्त नहीं कर सकती। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार की यह कार्यवाही संविधान के अनुच्छेद 14,16 व सुप्रीम कोर्ट की ओर से पारित आदेशों का उल्लंघन है।

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हिन्दुस्थान समाचार / लता