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नई दिल्ली, 09 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने जयपुर की बेशकीमती जमीन से जुड़े एक दशक पुराने मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को राहत दी है। न्यायालय ने स्व. ब्रिगेडियर महाराजा सवाई भवानी सिंह और राज परिवार के दूसरे सदस्यों के खिलाफ जेडीए की याचिका पर राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश को निरस्त कर दिया है जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाई गई थी।
मामला जयपुर के हथराई गांव की करीब 400 करोड़ रुपये मूल्य की बेशकीमती जमीन से जुड़ा है। इस जमीन पर वर्तमान में शुभम एन्क्लेव, राज महल रेजीडेंसीज और सी-स्कीम जैसी वीआईपी कालोनियां बसी हुई हैं। इसके अलावा इस गांव में कई स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक निर्माण के ढांचे मौजूद हैं। राजस्व रिकॉर्ड में ये भूमि सरकारी भूमि के रुप में दर्ज रही है।
दरअसल, 2005 में राजपरिवार ने कोर्ट में दावा किया कि ये भूमि उस विलय पत्र का हिस्सा है जिसके तहत जयपुर रियासत का भारत में विलय हुआ था। विलय पत्र के मुताबिक यह संपत्ति प्रिंसेज हाउस और प्रिंसेज क्लब से जुड़ी निजी संपत्ति है। जेडीए के मुताबिक ये भूमि कभी भी निजी संपत्तियों की सूची में शामिल नहीं थी। रिकार्ड इस बात की तस्दीक देते हैं कि 1993 से 1995 के बीच इस भूमि का बड़ा हिस्सा अधिग्रहित करते हुए मुआवजा भी दिया जा चुका है।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी