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खूंटी, 09 जनवरी (हि.स.)। अर्जुन मुंडा ने डोम्बारी बुरू के शहीदों को दी श्रद्धांजलि , कहा 9 जनवरी 1900 को डोम्बारी बुरु में ब्रिटिश शासकों ने सैकड़ों आदिवासियों का निर्मम नरसंहार किया था। इसी स्थान पर भगवान बिरसा मुंडा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लोगों को उलगुलान के लिए जागरूक कर रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने शुक्रवार को डोम्बारी बुरु जाकर बिरसा मुंडा एवं उस स्थान पर शहीद हुए आदिवासियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मौके पर अर्जुन मुंडा ने कहा कि परसों रात जल–जंगल–जमीन और आदिवासी संस्कृति की रक्षा करने वाले, परंपरा के संवाहक तथा एक लोकप्रिय सामाजिक कार्यकर्ता की उनके ही घर में गोली मारकर नृशंस हत्या कर दी गई। यह केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं है—यह हमारे इतिहास, हमारी पहचान और आदिवासी समाज को मिले संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। यह कोई पहली घटना नहीं है। उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ी शासन के दौर में भी मुंडा समाज पर गोलियां चली थीं, लेकिन हमारे पूर्वजों ने अत्याचार सहकर संघर्ष का इतिहास रचा। दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज आज़ाद भारत में, झारखंड की धरती पर वही गोलियां फिर से चल रही हैं, और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। घटना के बाद जब हम पीड़ित के घर पहुँचे, तो वहां भय, आक्रोश और असुरक्षा का माहौल था। भारी संख्या में लोग जमा थे।
वहीं जब भगवान बिरसा मुंडा के वंशज मंगल मुंडा का एक्सीडेंट हुआ था तब उन्हें देखने वाला कोई नहीं था, रात भर से रिम्स में एंबुलेंस में पड़े रहे लेकिन उनका इलाज तक शुरू नहीं हो पाया। सुबह जब उनका इलाज प्रारंभ हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अब वे हमारे बीच नहीं है। अस्पताल और प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण हमने भगवान बिरसा मुंडा के वंशज को खो दिया।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को उसके हक़ से बेदखल करने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं। लैंड बैंक के नाम पर जमीन की लूट, भूमि अधिसूचनाओं में छेड़छाड़, अनुसूचित क्षेत्रों की पंचायतों को नगर निगमों में मिलाने की कोशिश—ये सभी कदम संविधान, पंचायती राज व्यवस्था, पेसा कानून और सीएनटी–एसपीटी एक्ट पर खुला हमला हैं। राज्य सरकार को ऐसे असंवैधानिक बदलाव करने का कोई अधिकार नहीं है। लैंड बैंक और सभी असंवैधानिक भूमि अधिसूचनाएं तत्काल रद्द की जाएं और सीएनटी–एसपीटी क्षेत्रों में जमीन की लूट पर अविलंब रोक लगाई जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा