Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

पटना, 08 जनवरी (हि.स.)। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम के दुष्प्रभावों के विरुद्ध तथा मनरेगा की वैधानिक गारंटी की रक्षा के लिए कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन “मनरेगा बचाओ संग्राम” को सफल बनाने के उद्देश्य से आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम, पटना में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम ने की।
बैठक में “मनरेगा बचाओ संग्राम” अभियान की रणनीति, जिला-वार जिम्मेदारियों और कार्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा कर उसे अंतिम रूप दिया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नया वीबी-ग्रा-जी अधिनियम मनरेगा की मूल भावना पर सीधा हमला है। यह कानून गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण जनता के रोजगार के अधिकार को कमजोर करने वाला है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों गरीब परिवारों की आजीविका की वैधानिक गारंटी है, जिसे किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मनरेगा विरोधी नीति के खिलाफ पूरे प्रदेश में जन-जन को जागरूक करेगी और सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। “मनरेगा बचाओ संग्राम” के माध्यम से कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव, पंचायत-पंचायत जाकर केंद्र सरकार की नीतियों की सच्चाई जनता के सामने रखेंगे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि मनरेगा देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि काम के अधिकार और सम्मानजनक आजीविका की गारंटी है। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वीबी-ग्राम-जी विधेयक मनरेगा की आत्मा को कमजोर करने वाला, संघीय ढांचे पर प्रहार करने वाला और गरीब-मजदूर विरोधी कदम है। इसके दुष्परिणाम ग्रामीण रोजगार, मजदूरी भुगतान, सामाजिक सुरक्षा और पंचायती राज व्यवस्था पर पड़ेंगे।
इसी के विरोध में कांग्रेस पार्टी पूरे प्रदेश में “मनरेगा बचाओ संग्राम” का व्यापक, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक अभियान 10 जनवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 तक चलाएगी। इस संघर्ष का उद्देश्य केंद्र सरकार को उसकी जिम्मेदारी याद दिलाना, राज्यों पर डाले जा रहे आर्थिक बोझ को उजागर करना और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल कराना है।
10 जनवरी को जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ अभियान का औपचारिक शुभारंभ होगा। 11 जनवरी को एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध के माध्यम से अहिंसा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता व्यक्त की जाएगी।
इसके बाद 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर चौपालें, जनसंपर्क, नुक्कड़ सभाएं और पर्चा वितरण के जरिए जनता को जागरूक किया जाएगा। 30 जनवरी को वार्ड व ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरने होंगे। 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला कलेक्टर/डीएम कार्यालयों पर धरना देकर विधेयक वापसी और मनरेगा बहाली की मांग का ज्ञापन सौंपा जाएगा। 7 से 15 फरवरी के बीच राज्य स्तर पर विधानसभाओं का घेराव कर केंद्र की नीतियों का विरोध दर्ज कराया जाएगा। अंत में 16 से 25 फरवरी के दौरान एआईसीसी द्वारा आयोजित क्षेत्रीय रैलियों के साथ अभियान का समापन होगा।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / सुरभित दत्त