Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

हरिद्वार, 08 जनवरी (हि.स.)। आईआईटी रुड़की के पैरा एथलीट सौरव कुमार अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को ताक़त में बदल कर विश्व पैरा तैराकी चैम्पियनशिप की दहलीज तक पहुंच गए है। वह इटली में मार्च में होने वाली विश्व पैरा तैराकी चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे। दृढ संकल्पी सौरव कुमार स्विमिंग एथलीट के साथ आईआईटी रुड़की के स्नूकर चैम्पियन भी हैं।
वे आईआईटी रुड़की के टाइड्स केंद्र में संवर्धित गहन-प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप आईरिस इको-टेक के सह-संस्थापक तथा कृत्रिम पैर प्रौद्योगिकी पर कार्य करने वाले एक नवोन्मेषक भी हैं।आईआईटी रुड़की से हाल ही में बी.टेक. स्नातक हुए सौरव कुमार की यात्रा साहस, धैर्य और आशा की कहानी है। बचपन से ही निचले अंग की दिव्यांगता के साथ जीवन जीते हुए, सौरव ने चुनौतियों को अवसरों में बदला है, यह सिद्ध करते हुए कि दिव्यांगता को शरीर नहीं, बल्कि मन परिभाषित करता है।
पैरा खेलों के साथ सौरव का जुड़ाव वर्ष 2024 में शुरू हुआ, जब उनकी मुलाकात पैरा ओलंपियन मोहम्मद शम्स आलम और प्रमोद भगत से आईआईटी रुड़की में हुई। उनसे प्रेरित होकर सौरव ने तैराकी सीखने का संकल्प लिया। इसी संकल्प के चलते तीन महीनों के भीतर, उन्होंने राज्य स्तर पर दो रजत पदक जीते और वर्ष 2024 की राष्ट्रीय पैरा तैराकी चैम्पियनशिप में शीर्ष दस में स्थान प्राप्त किया।
सितंबर 2025 में उन्होंने राज्य स्तर पर दो स्वर्ण पदक जीते। इसके बाद 15 नवंबर 2025 में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में उन्होंने 100 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में चौथा स्थान प्राप्त किया और अब उन्हें आगामी एशियाई खेलों के साथ 12 मार्च 2026 को इटली में आयोजित होने वाली विश्व पैरा तैराकी चैम्पियनशिप श्रृंखला के लिए भी चयनित किया गया है।
एक नवोन्मेषक के रूप में असाधारण योगदान के लिए उन्हें व्यावसायिक विकास एवं नवाचार पुरस्कार 2025 और हरि कृष्ण मित्तल नेतृत्व पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया है। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर कमल किशोर पंत कहते हैं कि सौरव की कहानी आशा और संकल्प की एक मशाल के रूप में खड़ी है।
आईआईटी संस्थान, परिसर में 150 से अधिक दिव्यांग विद्यार्थियों के साथ, संस्थान सभी के लिए समान भागीदारी और अवसर सुनिश्चित करने हेतु कार्य कर रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला