Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

देहरादून, 09 जनवरी (हि.स.)। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम के तहत बीते 23 दिनों में राज्यभर में 300 से अधिक शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में करीब 1.98 लाख नागरिकों ने सहभागिता की, जबकि 1,11,326 नागरिकों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिला।
17 दिसंबर से प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों के माध्यम से प्रशासन और आमजन के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ, जिससे वर्षों से लंबित मामलों के समाधान के साथ-साथ शासन पर जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है। अब तक आयोजित शिविरों में कुल 1,97,522 नागरिकों ने अपनी समस्याएं, सुझाव और आवश्यकताएं संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखीं।
कार्यक्रम के दौरान आमजन से कुल 22,645 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 16,000 से अधिक शिकायतों का निस्तारण मौके पर अथवा निर्धारित समयसीमा के भीतर कर दिया गया है। शेष शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई प्रगति पर है। ये आंकड़े राज्य सरकार की तत्परता, जवाबदेही और कार्यसंस्कृति में आए सकारात्मक बदलाव को दर्शाते हैं।
इसके अतिरिक्त, शिविरों में विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए 31,070 आवेदन प्राप्त हुए, जिससे नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से राहत मिली। वहीं, प्रदेश सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से 1,11,326 व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हुए, जिससे सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सहायता और आजीविका से जुड़े प्रयासों को नई गति मिली है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर यह कार्यक्रम केवल शिकायत निवारण तक सीमित न रहकर, पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करने और सुशासन को जमीनी स्तर पर सशक्त करने का एक प्रभावी मंच बन रहा है।
राज्य सरकार का संकल्प है कि इस अभियान को निरंतर और व्यापक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक शासन की योजनाओं और सेवाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित हो सके तथा उत्तराखंड में पारदर्शी, जवाबदेह और जनकेंद्रित शासन व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सके।
---
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार