कुत्ते उन लोगों को सूंघ सकते हैं जिनसे वे डरते हैं और जब उन्हें इसका अहसास होगा तो वे हमला कर देंगे : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली, 08 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि कुत्तों को इंसान के डर का आभास हो जाता है। जब उन्हें लगता है कि सामने वाला डरा हुआ है तो वो उस पर हमला कर देते हैं। हम अपने व्यक्तिगत अनुभव से यह कह रहे हैं। जब एक डॉग लवर ने इस टिप्पणी से
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)


नई दिल्ली, 08 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय

ने कहा है कि कुत्तों को इंसान के डर का आभास हो जाता है। जब उन्हें लगता है कि सामने वाला डरा हुआ है तो वो उस पर हमला कर देते हैं। हम अपने व्यक्तिगत अनुभव से यह कह रहे हैं। जब एक डॉग लवर ने इस टिप्पणी से असहमति जताते हुए सिर हिलाया तो जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मैडम, आप ऐसे सिर मत हिलाइये। अगर कुत्तों को यह पता चल जाए कि सामने वाला डरा हुआ है तो इस बात की पूरी संभावना है कि वो आप पर हमला करेंगे। यहां तक कि आपका पालतू कुत्ता भी आप पर हमला करेगा।

सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय

ने हल्के अंदाज में कहा कि हमे कुत्तों की बजाए बिल्लियों को बढ़ावा देना चाहिए। चूहों की दुश्मन बिल्ली न होकर कुत्ते हैं। जस्टिस संदीप मेहता ने ये टिप्पणी डॉग लवर की ओर से पेश वकील सीयू सिंह की दलील के जवाब में की। सीयू सिंह ने कहा कि दिल्ली में चूहों का भी आतंक है। जब कुत्तों को हटाया जाता है तो चूहों की संख्या बढ़ जाती है। हमें देखना चाहिए कि 20-30 साल पहले सूरत में क्या हुआ था (उनका इशारा सूरत में फैली प्लेग बीमारी को लेकर था)। इस पर जस्टिस मेहता ने कहा कि इन दोनों के बीच क्या संबंध है। अगर हल्के अंदाज में देखा जाए तो कुत्ते और बिल्ली तो दुश्मन हैं। ऐसे में तो हमें बिल्लियों को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि वो चूहों को खा जाती हैं। जस्टिस संदीप मेहता ने इसके साथ ही यह भी जोड़ा कि कुत्तों को गली से ऐसे ही नहीं हटाया जा सकता। उन्हें नियमों के मुताबिक ही हटाया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील के. वेणुगोपाल ने कहा कि एबीसी रुल्स के मुताबिक पशुओं के प्रजनन पर नियंत्रण के लिए केवल 66 केंद्र हैं जो मान्यता प्राप्त हैं। इन केंद्रों को संचालित करने के लिए मैनपावर की भी कमी है। अगर हमें पशुओं की जनसंख्या नियंत्रित करनी है तो हमें ऐसे केंद्रों की संख्या कई गुणा बढ़ानी होगी। वेणुगोपाल ने कहा कि राज्य सरकारें अयोग्य लोगों को बधियाकरण के काम में लगा रहे हैं।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने पशु अधिकार संस्था पेटा की ओर से कहा कि इस मसले पर विचार करने के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कुत्तों को किसी शेल्टर होम में रखा जाता है तो वे क्रूर हो जाते हैं क्योंकि उन्हें काफी संकरे पिंजरे में रखा जाता है।

बता दें कि, 7 जनवरी को सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय

ने कहा था कि अब एक ही काम बाकी रह गया है कि आवारा कुत्तों की काउंसलिंग की जाए। दरअसल सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि अगर कोई कुत्ता बेकाबू है, तो एक सेंटर को फोन किया जाता है, जहां उसे पकड़ा जाता है, उसकी नसबंदी की जाती है और फिर उसे वापस उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा था कि अब बस यही बाकी है कि कुत्तों की भी काउंसलिंग दी जाए कि वो किसी को काटें नहीं।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी