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संस्कृत को सर्वसामान्य की भाषा बनाना पड़ेगा
लखनऊ,08 जनवरी (हि.स.)। संस्कृत भारती अवध एवं कानपुर प्रान्त का नौ दिवसीय प्रबोधन वर्ग का समापन गुरूवार को निराला नगर स्थित जे.सी. गेस्ट हाउस में संपन्न हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी ने कहा कि कक्षा बारह तक संस्कृत शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल विषय न होकर एक भाषा है, जिसमें हमारी सभ्यता एवं संस्कृति का मूल छुपा है। उन्होंने कहा कि पाण्डुलिपि ग्रंथों के लिए भारत सरकार के साथ उत्तर प्रदेश सरकार भी काम कर रही है। नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परम्परा पर भी कार्य चल रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र संगठन मन्त्री प्रमोद पण्डित ने कहा कि जब स्व आधारित हमारा जीवन होगा तब हम पुन: विश्वगुरु के सिन्हासन पर आरूढ़ होंगे। यदि भारत को भारत के रूप में अधिक विकसित करना है तो संस्कृत को सर्वसामान्य की भाषा बनाना पड़ेगा । इस दिशा में संस्कृत भारती प्रयत्न कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारत की प्रतिष्ठा ही संस्कृत और संस्कृति है। हमने भारत से संस्कृत निकाल दिया इसलिए इण्डिया बन गए। संस्कृत में सबकुछ है किन्तु फिर भी समाज में कुछ विमर्श स्थापित कर दिए गये कि संस्कृत बहुत कठिन है। संस्कृत तो प्राचीन है। संस्कृत तो केवल एक वर्ग की भाषा है। कहा की कार्यकर्ताओं को संस्कृत सम्भाषण में दक्ष कर समाज में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरित करना ही इस प्रकार के वर्गों का उद्दयेश है।
कार्यक्रम में वर्गाधिकारी धर्मेन्द्र सिंह ने वर्ग का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में संस्कृत भारती के न्यास के अध्यक्ष जे.पी.सिंह ने सभी का आभार प्रकट किया। इस वर्ग के शिक्षण प्रमुख अवध प्रान्त मन्त्री अनिल कुमार एवं महाप्रबंधक डॉ श्यामलेश कुमार त्रिपाठी रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन