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चतरा, 08 जनवरी (हि.स.)। भगवान सूर्य के 14 जनवरी की रात्रि में मकर राशि में करने के कारण स्नान-दान का महापर्व मकर संक्रांति इस बार 15 जनवरी को मनाई जाएगी। 15 जनवरी को तडके सुबह से ही मकर संक्रांति का स्नान-दान का पुण्य काल प्रारंभ हो जाएगा। इसी के साथ भगवान भास्कर दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाएंगे। हालांकि शुक्र के अस्त रहने के कारण धार्मिक और मांगलिक आयोजन अभी शुरू नहीं होंगे। जन्मकुंडली, वास्तु और कर्मकांंड परामर्श के विशेषज्ञ आचार्य पंडित चेतन पाण्डेय ने गुरुवार को बताया कि इस बार मकर संक्रांति पर कई विशेष संयोग बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि हृषिकेश पंचांग के अनुसार भगवान् सूर्य माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि दिन बुधवार (14 जनवरी) की रात 9.38 बजे बृहस्पति की धनु राशि से शनि की राशि मकर में प्रवेश करेंगे।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार मकर की संक्रांति जब रात्रि बेला हो तो इसका पुण्य काल अगले दिन होता है। लिहाजा इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। आचार्य ने कहा कि मकर संक्रांति पर इस बार सूर्य, गुरु और शनि का खास संयोग बन रहा है। यह बेहद लाभकारी माना गया है। इस बार मकर संक्रांति और खिचड़ी एक दिन ही मनेगा। शास्त्रों के अनुसार गुरुवार को तिल का दान और सेवन काफी लाभप्रद होता है। उन्होंने कहा कि जिन जातकों की जन्मकुंडली में अभी बृहस्पति का महादशा चल रहा हो या जन्मकुंडली में बृहस्पति कमजोर हैं। उन्होंने बताया कि जिस जातक पर गुरु की कृपा नहीं बन पा रही हो, उनके लिए इस बार मकर संक्रांति खास होगा। इतना ही नहीं जिनके राशि पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रहा है उनके लिए भी इस बार मकर संक्रांति का दिन विशेष होगा। इस दिन स्नान-ध्यान के साथ तिल का दान और सेवन काफी लाभप्रद माना गया है।
आचार्य ने कहा कि अगले वर्ष 2027 में भी 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष पौष के महीने में ही मकर संक्रांति होगी।
देवताओं की प्रभात बेला है उत्तरायण
आचार्य ने कहा कि भगवान सूर्य मकर राशि में प्रवेश के साथ ही वे दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाएंगे। इनके उत्तरायण होने से देवताओं का दिन प्रारंभ होगा और सनातन धर्मावलंबियों का मांगलिक कार्य शुरू होगा। मकर संक्रांति के दिन इस बार वृद्धि नाम का योग पड़ रहा है। यह योग खासकर महिलाओं के भाग्य उदय का संयोग बना रहा है। वहीं संक्रान्ति काल के समय चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान रहेंगे। वृष राशि का चंद्र और मकर राशि का सूर्य की युति विद्यार्थी वर्ग के लिए अपार सफलता अर्जित कराने वाला योग माना गया है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत् गीता में कहा गया है कि उत्तरायण काल में मृत्यु होने से मानव श्रीकृष्ण के परम धाम को प्राप्त करते हैं और वह जन्म मृत्यु से मुक्त हो जाते हैं, जबकि अन्य काल में प्राण त्यागने वाले मनुष्य को दोबारा जन्म लेना पड़ता है। यही कारण है कि महाभारत में अर्जुन के बाणों की शैया पर 40 दिन रहने के बाद भीष्म पितामह ने उत्तरायण काल में ही अपना प्राण का त्याग किया था।
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हिन्दुस्थान समाचार / जितेन्द्र तिवारी