देशद्रोही मानसिकता को दर्शाता है जेएनयू का घटनाक्रम: रोहित पांडे
भागलपुर, 08 जनवरी (हि.स.)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से जुड़े हालिया घटनाक्रम को लेकर बिहार के भागलपुर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक रोहित पांडेय ने गुरुवार को कहा कि जेएनयू में सामने आया घटनाक्रम देशद्रोही मानसिकता को दर्शाता है, जिस
विधायक रोहित पांडे


भागलपुर, 08 जनवरी (हि.स.)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से जुड़े हालिया घटनाक्रम को लेकर बिहार के भागलपुर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक रोहित पांडेय ने गुरुवार को कहा कि जेएनयू में सामने आया घटनाक्रम देशद्रोही मानसिकता को दर्शाता है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

विधायक रोहित पांडेय ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार की आड़ में देश के खिलाफ नारेबाजी करना या देश के बड़े नेताओं के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी करना कतई उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ न केवल देश की एकता और अखंडता को चुनौती देती हैं, बल्कि युवाओं को भी गुमराह करने का काम करती हैं।

रोहित पांडेय ने जेएनयू प्रबंधन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को चाहिए कि वह इस पूरे मामले को गंभीरता से ले और दोषी छात्रों एवं संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से राष्ट्रविरोधी विचारधारा को बढ़ावा देना बेहद चिंताजनक है। इस पर राजनीति से ऊपर उठकर सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

रोहित पांडेय ने कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश के खिलाफ या देश के बड़े नेताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की जाए। जेएनयू में जो घटनाक्रम सामने आया है, वह निंदनीय है और वहां के प्रबंधन को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

भू-विवाद को लेकर विधायक ने कहा है भूमि विवाद की समस्या को एक दिन में समाप्त करना संभव नहीं है लेकिन यदि सरकार जनता के द्वार तक पहुँच रही है तो इससे निश्चित रूप से विभागीय तंत्र की वर्षों पुरानी तंद्रा टूटेगी। उन्होंने कहा कि भू–राजस्व से जुड़ी कई समस्याएँ आज भी ज़मीनी स्तर पर बनी हुई हैं। इन्हीं समस्याओं के समाधान को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री का जिलावार दौरा चल रहा है, ताकि आम लोगों को त्वरित और प्रभावी राहत मिल सके।

रोहित पाण्डेय ने कहा कि सिर्फ सरकारी योजनाएँ और आदेश ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि विभागीय कर्मचारियों को भी संवेदनशीलता के साथ कार्य करना होगा। जब तक कर्मचारी जनता की समस्याओं को समझकर ईमानदारी से कार्य नहीं करेंगे, तब तक भूमि विवाद जैसे मामलों का स्थायी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार की इस पहल से भू–राजस्व से जुड़े मामलों में पारदर्शिता आएगी और आम जनता को न्याय मिलेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर