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कोरबा, 08 जनवरी (हि. स.)। जिला कांग्रेस के शहर अध्यक्ष मुकेश राठौर ने शासन-प्रशासन के कामकाज और नियमों को लेकर कड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने गुरुवार काे प्रेस नोट जारी कर कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर के तहत कोरबा जिले की चारों विधानसभाओं में लगभग 40 हजार मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनसे दावा-आपत्ति ली जा रही है। इससे आम मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
राठौर ने कहा कि कोई मतदाता बीएलओ की तलाश में भटक रहा है, कोई स्कूलों में पुरानी अंकसूची ढूंढ रहा है, तो कोई शपथ पत्र बनवाने के लिए तहसील कार्यालयों के चक्कर काट रहा है। उन्होंने बताया कि वे जिला कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ वार्ड पार्षद भी हैं, इसलिए बड़ी संख्या में आम लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंच रहे हैं। ऐसी ही स्थिति पूरे प्रदेश के जनप्रतिनिधियों के सामने है।
उन्होंने निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान उद्घाटन और भूमिपूजन से जुड़ी शिलापट्टिकाओं को चुनाव आचार संहिता के तहत ढक दिया गया था, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी कई स्थानों पर यह शिलापट्टिकाएं अब तक ढकी हुई हैं। इनमें तत्कालीन मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक, महापौर और पार्षदों के नाम दर्ज हैं, लेकिन आयोग ने इन्हें उजागर करने की सुध नहीं ली।
मुकेश राठौर ने कहा कि प्रदेशभर की जनता आज सेवा केंद्र, सुविधा केंद्र, च्वाइस सेंटर, तहसील कार्यालय, धान खरीद केंद्र, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन विभाग के चक्कर लगाने को मजबूर है। हजारों राशन कार्डधारियों को दिसंबर माह का राशन नहीं मिला क्योंकि उनका केवाईसी अपडेट नहीं था। अब वे महतारी राशन कार्ड लेकर च्वाइस सेंटर और पोस्ट ऑफिस में घंटों लाइन में खड़े होकर केवाईसी करवा रहे हैं।
धान खरीद व्यवस्था पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कई केंद्रों में किसानों को धान बेचने में परेशानी हो रही है। कहीं तौल में निर्धारित मात्रा से अधिक धान लिया जा रहा है, तो अधिकांश केंद्रों में हमाल की व्यवस्था नहीं है, जिससे किसान स्वयं काम करने को मजबूर हैं। कई किसानों के पास अधिक रकबा होने के बावजूद वे पूरा धान नहीं बेच पा रहे हैं।
राठौर ने बताया कि आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, जाति, निवास, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, रोजगार पंजीयन, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, बैंक खाता और मतदाता सूची जैसे आवश्यक दस्तावेज बनवाने या उनमें सुधार कराने के लिए लोग लगातार भटक रहे हैं और कार्यालयों में लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे मूलभूत दस्तावेज बनाते समय शासन-प्रशासन पूरी सावधानी और सहयोग करे, ताकि बाद में जनता को परेशान न होना पड़े।
हिन्दुस्थान समाचार/ हरीश तिवारी
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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी