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--नियुक्ति शून्य घोषित, वेतन वसूली के खिलाफ याचिका खारिज
प्रयागराज, 08 जनवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि नियुक्ति शून्य घोषित कर सेवा समाप्ति आदेश के खिलाफ याचिका खारिज कर दी गई और इस आदेश को विशेष अपील में चुनौती दी गई है, तो लिए गये वेतन की वसूली कार्यवाही के खिलाफ दूसरी याचिका पोषणीय नहीं है।
कोर्ट ने कहा एक ही मामले में बार-बार याचिका दायर नहीं की जा सकती। वेतन वसूली आदेश सेवा समाप्ति आदेश के परिप्रेक्ष्य में जारी किया गया है। जिसे अलग से याचिका दायर करने के बजाय अपील में ही उठाना चाहिए। कोर्ट ने वसूली आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका ग्राह्य न मानते हुए खारिज कर दी।
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने कृष्ण कांत की याचिका पर दिया है। 4 जुलाई 25 के आदेश से याची की नियुक्ति शून्य करार दी गई और 19 अगस्त 25 के आदेश ने इस दौरान लिए गए वेतन रूपये 71,10,614 की वसूली कार्यवाही शुरू की गई है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कहा एक ही वाद कारण को लेकर दुबारा याचिका दायर नहीं की जा सकती। यहां विबंध न्याय का सिद्धांत लागू हो जायेगा। एक ही मामले में बार बार याचिका दायर करने की कोर्ट ने आलोचना भी की है।और इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरूपयोग माना है। विशेष अपील विचाराधीन तो समानांतर कार्यवाही की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे