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उज्जैन, 08 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में गुरूवार को सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय युवा उत्सव अभ्युदय के शुभारंभ समारोह को गुवाहाटी से वर्चुअली शुभारंभ किया। इस युवा उत्सव में प्रदेश के 15 विश्वविद्यालयों के 800 प्रतिभागी युवक-युवतियां विभिन्न 22 विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
शुभारंभ समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि मध्य प्रदेश के युवा नए भारत के शिल्पी हैं। शिक्षा, रोजगार और तकनीक के त्रिवेणी संगम पर ध्यान देने की आवश्यकता है। मध्यप्रदेश आज देश में सर्वाधिक तेज गति से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, यह युवाओं के कौशल विकास और समग्र व्यक्तित्व निर्माण का आधार है।
डॉ. यादव ने गुवाहाटी के वस्त्र एवं टेक्सटाइल समिट का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे सही प्रशिक्षण और नीतियों से लाखों युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुलते हैं। उन्होंने कुलगुरु डॉ. अर्पण भारद्वाज से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय में ऐसे प्रोफेशनल और स्किल-आधारित पाठ्यक्रम लाएं जो सीधे तौर पर उद्योगों की जरूरतों को पूरा करें। शिक्षा ऐसी हो जहां छात्र केवल कर्मचारी न बनें, बल्कि उत्पादन से लेकर प्रबंधन तक पूरी श्रृंखला का नेतृत्व युवा करें। उन्होने उज्जैन के गौरवशाली अतीत को आधुनिक तकनीक से जोडऩे की घोषणा की। सभी अतिथियों और छात्रों से उज्जैन के पास स्थित डोंगला समय गणना केंद्र का भ्रमण करने का आग्रह किया। बताया कि आगामी समय में वहां स्पेस रिसर्च लैबोरेट्रीज स्थापित की जाएंगी, जिससे उज्जैन खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान का वैश्विक केंद्र बनेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से हमारे प्राचीन गणितज्ञों, खगोलविदों और आयुर्वेद के ज्ञान को फिर से स्थापित किया जा रहा है। आगामी वर्षों में युवा उत्सव में कोरियोग्राफी, मेहंदी और वीडियोग्राफी जैसे डिजिटल और रचनात्मक कौशलों को भी जोड़ा जाएगा,ताकि कला के साथ रोजगार के द्वार भी खुलें।
राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथजी ने युवा शक्ति को भारतीय संस्कृति के सच्चे रक्षक के रूप में परिभाषित किया। उन्होने शिक्षा के वास्तविक अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल डिग्री प्राप्त कर लेना ही शिक्षा नहीं है। उन्होंने कहा कि माता के प्रेम और आंचल से जुड़ी पहली शिक्षा ही बालक के जीवन की नींव होती है, जिसके बाद गुरु परंपरा के साथ मिलने वाली दीक्षा और शिक्षा उसके चरित्र का निर्माण करती है। प्राचीन काल में गुरु के गुरु मंत्र से ही विद्यार्थियों में वह संस्कार जाग्रत किए जाते थे, जो उन्हें विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहने की शक्ति देते थे।
कार्यक्रम में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल,रूप पमनानी,कुलसचिव डॉ.अनिलकुमार शर्मा भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में अभिषेक शुक्ला ने कर्नाटक संगीत में शिव वंदना प्रस्तुत की। स्वागत भाषण में प्रो. एसके मिश्रा ने बताया कि प्रदेश के 15 विश्वविद्यालयों से 800 से अधिक प्रतिभागी इस महोत्सव में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने आए हैं। आभार कुलगुरु डॉ. अर्पण भारद्वाज ने माना।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल