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वाराणसी, 07 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बुधवार को शिक्षाविद् एवं चिंतक डॉ. पूर्णमासी राय की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रनिर्माण के क्षेत्र में डॉ. राय के बहुआयामी योगदान को स्मरण करते हुए उनके विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में शिक्षा सेवा चयन आयोग, उत्तर प्रदेश के सदस्य डॉ. हरेन्द्र कुमार राय ने डॉ. पूर्णमासी राय से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए कहा कि उनका समूचा जीवन शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाने के लिए समर्पित रहा। उन्होंने शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला साधन माना।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य प्रो. अवधेश प्रधान ने डॉ. राय को एक प्रेरक शिक्षक और मानवीय मूल्यों के संवाहक के रूप में स्मरण किया। वहीं विशिष्ट अतिथि प्रो. विनय कुमार पांडेय, समन्वयक, वैदिक विज्ञान केंद्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने उनके वैचारिक योगदान को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ते हुए रेखांकित किया।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ. उदय प्रताप सिंह, पूर्व अध्यक्ष, हिन्दुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज ने कहा कि डॉ. पूर्णमासी राय का व्यक्तित्व अकादमिक अनुशासन और सामाजिक सरोकारों का दुर्लभ समन्वय था। विशिष्ट वक्ता साहित्यकार डॉ. रामसुधार सिंह, पूर्व अध्यक्ष, यूपी कॉलेज ने उनके शैक्षिक नेतृत्व और मानवीय दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए राँची विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जंगबहादुर पाण्डेय ने कहा कि डॉ. पूर्णमासी राय का जीवन और चिंतन नई पीढ़ी के लिए सतत प्रेरणा का स्रोत है तथा उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित विद्वानों एवं साहित्यकारों ने डॉ. पूर्णमासी राय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी