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जम्मू 07 जनवरी (हि.स.)। प्रशासनिक जवाबदेही और धार्मिक संस्थाओं की पवित्रता के लिहाज से एक अहम फैसले में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और केंद्र सरकार ने श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की मान्यता रद्द कर दी है। यह कार्रवाई संस्थान द्वारा एनएमसी के अनिवार्य वैधानिक मानकों और आधारभूत ढांचे की शर्तों का पालन न करने के चलते की गई है। इस निर्णय का राष्ट्रीय परशुराम परिषद (आरपीपी) ने औपचारिक रूप से स्वागत किया है। परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता व अध्यक्ष पं. जीव नंद शर्मा ने इसे “देर आए, दुरुस्त आए” की संज्ञा देते हुए पारदर्शिता और कानून के शासन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि धार्मिक ट्रस्ट से जुड़े किसी भी संस्थान को वैधानिक नियमों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जा सकती, विशेषकर जब मामला चिकित्सा शिक्षा और श्रद्धालुओं के धन से जुड़ा हो।
पं. शर्मा ने बताया कि परिषद लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रही थी। इसी क्रम में जम्मू प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस और विस्तृत कानूनी प्रतिवेदन भी सौंपा गया था। परिषद का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड अधिनियम, 1988 की मूल भावना के विपरीत थी और इससे श्रद्धालुओं के पवित्र दान का व्यावसायिक उपयोग हुआ। आरपीपी ने करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बने मौजूदा ढांचे को वेद अध्ययन केंद्र, षड्दर्शन संस्थान और आयुर्वेदिक अनुसंधान केंद्र में परिवर्तित करने की मांग की है। साथ ही गुरुकुल और गोशालाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। परिषद ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को ज्ञापन सौंपकर श्राइन बोर्ड अधिनियम के उल्लंघनों को सुधारने की मांग करने की भी घोषणा की है।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा