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नई दिल्ली, 07 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू ने कहा है कि शिक्षा केवल सशक्तिकरण का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक चेतना की आधारशिला है। सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख के विचार सामाजिक परिवर्तन के लिए आज भी प्रासंगिक हैं।
उन्होंने यह टिप्पणी महान समाज सुधारक एवं महिला शिक्षा की अग्रदूत सावित्रीबाई फुले एवं फातिमा शेख की स्मृति में राजधानी में मंगलवार शाम आयोजित संगोष्ठी में की। संगोष्ठी आयोजक क्रिएटिव फाउंडेशन (दिल्ली) के संस्थापक अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता तेज सिंह वरुण ने अपने वक्तव्य में कहा कि महिला सशक्तिकरण तभी सार्थक होगा जब उनमें शिक्षा के साथ कानूनी जागरुकता आएगी।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिला प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश टीआर नवल, डीआईजी नरेंद्र सिंह, आईपीएस (सेवानिवृत्त) ओपी सागर, संगोष्ठी संयोजक अधिवक्ता पूजा कुमारी ने भी महिला सशक्तिकरण पर विचार रखे।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद