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नई दिल्ली, 06 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा में श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने नौवें सिख गुरु श्री गुरु तेगबहादुर जी की महान शहादत को स्मरण करते हुए इसे मानवता, धार्मिक स्वतंत्रता और सत्य के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान बताया।
सिरसा ने सदन में कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की शहादत दिल्ली की धरती पर हुई और यह केवल सिख समाज ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र और विश्व मानवता के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार गुरु तेगबहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए औरंगज़ेब के अत्याचारों के सामने झुकने से इनकार करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने मानवता के लिए, लोगों के धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यह शहादत केवल सिखों की नहीं, पूरे देश की विरासत है। मंत्री ने गुरु जी के साथ शहीद हुए भाई मती दास, भाई सती दास और भाई दयाला जी की अमानवीय यातनाओं तथा गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबज़ादों, विशेषकर बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की अल्पायु में दी गई शहादत को भी स्मरण किया।
इस दौरान सदन में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना का उल्लेख करते हुए सिरसा ने कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की शहादत पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष द्वारा गुरु साहब के नाम के साथ एक ही वाक्य में असंवेदनशील और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया, जो किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। सिरसा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब गुरु तेग बहादुर जी की शहादत की बात हो रही हो, उस समय किसी भी प्रकार का अपशब्द, चाहे किसी भी भाव में कहा गया हो, पाप के समान है। गुरु साहब के नाम के साथ ऐसा शब्द बोलना असम्मानजनक है और इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदूषण जैसे गंभीर विषय पर चर्चा के लिए सरकार पहले ही अलग से पूरा दिन निर्धारित कर चुकी है, लेकिन शहादत जैसे पवित्र विषय को भटकाने का प्रयास निंदनीय है। मंत्री ने इस विषय पर सरकार द्वारा निंदा प्रस्ताव लाने का भी समर्थन किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव