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ग्वालियर, 06 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आकर्षक रोशनी में नहाए भव्य शोरूम और आधुनिक दुकानों के बीच व्यापार मेला की असली आत्मा उन छोटी-छोटी दुकानों में बसती है, जहाँ कम कीमत में जरूरत और खुशी दोनों मिल जाती हैं। यही कारण है कि श्रीमंत माधवराव सिंधिया ग्वालियर व्यापार मेला केवल वैभव का प्रदर्शन नहीं, बल्कि आमजन के जीवन से जुड़ा एक जीवंत उत्सव बनकर उभरता है। लगभग 121 वर्षों की परंपरा को समेटे श्रीमंत माधवराव सिंधिया ग्वालियर व्यापार मेला समय के साथ बदला जरूर है।
जनसम्पर्क अधिकारी हितेन्द्र सिंह भदौरिया ने मंगलवार को बताया कि अब मेले में बड़े इलेक्ट्रॉनिक, फर्नीचर और वाहनों के शोरूम सजते हैं। लेकिन “हर माल 10 रुपये” से लेकर “हर माल 150 रुपये” वाली दुकानों की चमक आज भी उतनी ही कायम है। इन दुकानों पर उमड़ती सैलानियों की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि मेला आर्थिक रूप से सम्पन्न वर्ग के साथ-साथ सामान्य और कमजोर आय वर्ग की जरूरतों को भी समान सम्मान देता है। मेले में सजी “हर माल 10 रुपये” की दुकानों से सैलानी रूमाल, हेयर बैंड, रबर क्लिप, कंघे, चाय की छन्नी और बच्चों के खिलौने खरीदते नजर आते हैं। वहीं “हर माल 20 रुपये” की दुकानों पर पर्स, की-रिंग, प्लास्टिक टब, डलिया, गमले और डस्टबिन लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं।
इसी तरह “हर माल 50 रुपये” वाली दुकानों पर पूजा की थाली, गैस चूल्हा स्टैंड, चमचे, छलनी, टॉर्च, पानी की बोतल, टिफिन, किसनी और फ्राई पैन की खूब बिक्री हो रही है। इसके अतिरिक्त 100, 150 और 200 रुपये की दुकानों पर लोअर, गरम स्वेटर और जैकेट खरीदने वालों की भीड़ सर्दी की जरूरत और मेले की उपयोगिता दोनों को दर्शाती है। कहना गलत नहीं होगा कि ग्वालियर व्यापार मेला केवल खरीद-बिक्री का स्थान ही नहीं, बल्कि जनजीवन की जरूरतों, लोककला की सादगी और बाजार की आत्मा का सुंदर संगम है। यहाँ हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ है और शायद यही वजह है कि यह मेला पीढ़ियों से लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए है।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर