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नई दिल्ली, 06 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को कहा कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं सदस्य आतिशी द्वारा मीडिया को गुमराह किया गया है और सदन को भ्रमित करने वाले बयान दिए गए हैं। उनके द्वारा कहा गया कि “आज सदस्यों को केवल मास्क पहनने के कारण विधानसभा से बाहर कर दिया गया” पूर्णतः असत्य है और सदन की वास्तविक कार्यवाही को प्रतिबिंबित नहीं करता है। चार विधायकों (संजीव झा, सोम दत्त, कुलदीप कुमार एवं जरनैल सिंह) को सदन से निलंबित किए जाने का एकमात्र कारण कार्यवाही में जानबूझकर किया गया व्यवधान था।
इस कार्रवाई का मास्क पहनने से कोई संबंध नहीं था। किसी भी स्तर पर किसी सदस्य को केवल मास्क पहनने के कारण न तो निष्कासित किया गया और न ही निलंबित। इस प्रकार के दावे तथ्यों का घोर गलत प्रस्तुतीकरण हैं। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सदन की गरिमा, अनुशासन एवं अधिकार बनाए रखने के उद्देश्य से तथा दिल्ली विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली के पूर्णतः अनुरूप लिया गया।
सदन की अवमानना की श्रेणी में आने वाले आचरण को देखते हुए, इस विषय को नियम 82 के अंतर्गत विशेषाधिकार समिति को सौंपा गया है। उक्त नियम के अनुसार, “अध्यक्ष किसी भी विशेषाधिकार या अवमानना से संबंधित प्रश्न को जांच, परीक्षण या प्रतिवेदन हेतु विशेषाधिकार समिति को भेज सकते हैं तथा सदन को इसकी सूचना दे सकते हैं।” यह संदर्भ पूर्णतः नियम की भावना और दायरे में किया गया है।
उल्लेखनीय है कि नियम 221 के तहत विशेषाधिकार समिति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह “प्रकरण से संबंधित साक्ष्यों एवं परिस्थितियों के आलोक में यह परीक्षण करे कि क्या विशेषाधिकार का उल्लंघन या सदन की अवमानना हुई है, उल्लंघन की प्रकृति क्या है तथा उससे जुड़ी परिस्थितियों का परीक्षण कर उपयुक्त सिफारिशें प्रस्तुत करे।”
इसके अतिरिक्त, यह भी रिकॉर्ड पर रखा जाना आवश्यक है कि नेता प्रतिपक्ष एवं सदस्य आतिशी ने “दिल्ली में प्रदूषण” के विषय पर चर्चा आरंभ करने का प्रयास उस समय किया, जबकि यह विषय पहले से ही 7 जनवरी 2026 को चर्चा हेतु कार्यसूची में सूचीबद्ध था। अध्यक्ष द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया था कि उक्त विषय को निर्धारित समय पर लिया जाएगा। इसके बावजूद, सूचीबद्ध कार्य से पूर्व इस मुद्दे को उठाने का प्रयास सदन की सुव्यवस्थित कार्यवाही में जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करने और निर्धारित कार्यक्रम को बाधित करने का एक सोचा-समझा प्रयास माना गया है। अध्यक्ष द्वारा की समस्त कार्रवाई संविधान, नियमों एवं सदन की परंपराओं के अनुरूप है तथा सदन की मर्यादा और गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव