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लखनऊ, 05 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार के प्रयास धरातल पर उतरकर राज्य की छवि सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। व्यापार सुधारों से गुजर रहे उत्तर प्रदेश ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए केंद्र सरकार के “डी-रेगुलेशन 1.0” कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह रैंकिंग व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से चिन्हित 23 प्रमुख प्राथमिक सुधार क्षेत्रों के प्रभावी और समग्र क्रियान्वयन के आधार पर जारी की गई है। इसी के साथ, उत्तर प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जिसने सभी 23 सुधारों को पूर्ण रूप से लागू किया है।
राष्ट्रीय मूल्यांकन में यूपी शीर्ष पर
भारत सरकार द्वारा किए गए राज्य-वार मूल्यांकन में उत्तर प्रदेश ने भूमि, भवन एवं निर्माण, श्रम, यूटिलिटीज और विभिन्न अनुमतियों से जुड़े पांच प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। इन क्षेत्रों में लागू सुधारों ने समग्र व्यापारिक माहौल को अधिक सुगम और भरोसेमंद बनाया है।
भूमि सुधारों से निवेश को नई गति
भूमि संबंधी सुधारों के तहत राज्य में मिश्रित उपयोग विकास को बढ़ावा देने के लिए फ्लेक्सिबल जोनिंग फ्रेमवर्क अपनाया गया है। भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए इसे पूरी तरह डिजिटल किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक विकास के लिए न्यूनतम सड़क चौड़ाई मानकों का युक्तिकरण किया गया। साथ ही, उपलब्ध औद्योगिक भूमि का जीआईएस आधारित लैंड बैंक विकसित कर उसे इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक से जोड़ा गया, जिससे निवेशकों को सटीक और पारदर्शी जानकारी मिल सके।
भवन एवं निर्माण प्रक्रियाओं में सरलता
औद्योगिक और वाणिज्यिक भूखंडों में भूमि हानि को कम करने के उद्देश्य से भवन विनियमों में संशोधन किए गए हैं। प्रदेश में भवन स्वीकृतियों, संयुक्त निरीक्षण, अग्निशमन निरीक्षण तथा अधिभोग और पूर्णता प्रमाण पत्रों के ऑनलाइन निर्गमन में सूचीबद्ध तृतीय पक्ष संस्थाओं की भूमिका को मजबूत किया गया, जिससे अनुमोदन की समय-सीमा में उल्लेखनीय कमी आई है।
श्रम सुधारों से बढ़ा कार्यबल का दायरा
श्रम सुधारों के अंतर्गत कुछ जोखिमपूर्ण उद्योगों में महिलाओं के कार्य पर लगे प्रतिबंध हटाए गए हैं। कारखानों, दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में महिलाओं को रात्रिकालीन कार्य की अनुमति दी गई तथा कार्य समय की सीमाओं का युक्तिकरण किया गया। इसके अतिरिक्त, दुकान एवं स्थापना अधिनियम के अंतर्गत अनुपालन के लिए श्रमिकों की न्यूनतम सीमा बढ़ाकर 20 या उससे अधिक कर दी गई है।
डिजिटल प्रणालियों से स्वीकृति प्रक्रिया हुई तेज
प्रदेश में पर्यावरणीय स्वीकृतियों के लिए तृतीय पक्ष प्रमाणीकरण की व्यवस्था लागू की गई है। कारखाना और व्यापार लाइसेंस की स्वीकृति ऑनलाइन माध्यम से सरल की गई। एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विद्युत और जल कनेक्शन की प्रक्रिया को तेज किया गया है, जबकि गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को श्वेत श्रेणी में पुनर्वर्गीकृत किया गया है।
सिंगल विंडो से मजबूत हुआ सुधार तंत्र
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि राज्य में उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार (प्राविधानों में संशोधन) अधिनियम, 2025 लागू किया गया है। इसके साथ ही, सभी राज्य स्तरीय सेवाओं को राज्य सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से एकीकृत किया गया है। इन पहलों ने सुधारों के पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाया है। इन व्यापक सुधारों के साथ उत्तर प्रदेश देश के सबसे प्रगतिशील और निवेश-अनुकूल राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है और एक सुदृढ़, पारदर्शी तथा विकासोन्मुख व्यापारिक वातावरण के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप