राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर कार्यक्रम का किया उद्घाटन
गुवाहाटी, 4 जनवरी (हि.स.)। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने सोमवार को कॉटन विश्वविद्यालय के केबीआर ऑडिटोरियम में ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता: 21वीं सदी की शिक्षा के लिए एक आवश्यक समन्वय’ विषय पर छह दिवसीय संकाय विकास कार्यक
Governor Laxman Prasad Acharya Inaugurating FDP on Indian Knowledge System and AI.


गुवाहाटी, 4 जनवरी (हि.स.)। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने सोमवार को कॉटन विश्वविद्यालय के केबीआर ऑडिटोरियम में ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता: 21वीं सदी की शिक्षा के लिए एक आवश्यक समन्वय’ विषय पर छह दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम लोक भवन, असम की पहल के तहत अंतर-विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी और कॉटन विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया है।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आचार्य ने कहा कि शिक्षण एक विशिष्ट पेशा है, जो केवल ज्ञान के हस्तांतरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व, मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने अनुभवात्मक, शिक्षार्थी-केंद्रित और क्षेत्र-आधारित शिक्षण-अधिगम पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह नीति शिक्षकों के शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करने की आधारशिला है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ बौद्धिक एवं नैतिक रूप से सशक्त विद्यार्थियों का निर्माण संभव होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के समन्वय के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

राज्यपाल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी का मार्गदर्शन मानवीय मूल्यों से होना चाहिए, ताकि इसके परिणाम समावेशी और सार्थक हों। उन्होंने उत्तर-पूर्व क्षेत्र में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और स्वदेशी परंपराएं आधुनिक तकनीक के साथ मिलकर सतत समाधान प्रस्तुत कर सकती हैं।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कथन - “सच्चे शिक्षक वे हैं जो हमें स्वयं सोचने में सहायता करते हैं”- का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यक्रम शिक्षकों को समृद्ध करेगा, सहयोगात्मक शोध को बढ़ावा देगा और नवाचारी शिक्षण पद्धतियों को प्रोत्साहित करेगा, जिससे शिक्षा प्रणाली सुदृढ़ होगी और ज्ञान-आधारित समाज के राष्ट्रीय लक्ष्य को बल मिलेगा।

इस अवसर पर कॉटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र डेका, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के आईयूसीटीई के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह, असम सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के सलाहकार प्रो. देबब्रत दास, राज्यपाल के ओएसडी प्रो. बेचन लाल सहित विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के संकाय सदस्य एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश